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AIIMS Research: ‘माइटोकॉन्ड्रिया’ बनेगा भविष्य की चिकित्सा का आधार, कई गंभीर बीमारियों में अहम भूमिका

AIIMS Research: ‘माइटोकॉन्ड्रिया’ बनेगा भविष्य की चिकित्सा का आधार, कई गंभीर बीमारियों में अहम भूमिका

नई दिल्ली। All India Institute of Medical Sciences में आयोजित राष्ट्रीय संवाद के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि Mitochondria भविष्य की चिकित्सा का एक अहम आधार बनने जा रहा है। यह कोशिकाओं का वह महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसे ‘पावरहाउस’ कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और कई जटिल जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, माइटोकॉन्ड्रिया केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के मेटाबॉलिज्म, कोशिकीय सिग्नलिंग, उम्र बढ़ने की प्रक्रिया और कई बीमारियों के विकास में भी अहम भूमिका निभाता है। यही कारण है कि आधुनिक चिकित्सा में इसकी उपयोगिता लगातार बढ़ती जा रही है।

इस राष्ट्रीय संवाद में देशभर के वैज्ञानिक, डॉक्टर और शोधकर्ता शामिल हुए, जिनमें प्रो. संतोष सांडूर, प्रो. राणा पी. सिंह, डॉ. पी. गोविंदराज, प्रो. निरुपम मदान, प्रो. मधुमिता रॉय चौधुरी, डॉ. शेफाली गुलाटी और डॉ. विक्रम सैनी प्रमुख रहे। सभी विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि माइटोकॉन्ड्रिया पर आधारित रिसर्च भविष्य में नई थेरेपी विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

विशेषज्ञों ने बताया कि माइटोकॉन्ड्रिया का संबंध कई गंभीर बीमारियों से है, जिनमें न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर, ऑटिज्म और Tuberculosis जैसी बीमारियां शामिल हैं। इन बीमारियों के उपचार में माइटोकॉन्ड्रिया की भूमिका को समझना बेहद जरूरी है, ताकि अधिक प्रभावी और सटीक इलाज विकसित किया जा सके।

वैज्ञानिकों ने इस दिशा में मजबूत रिसर्च प्लेटफॉर्म और उन्नत वैज्ञानिक टूल्स विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका मानना है कि बेसिक साइंस में होने वाली खोजें ही भविष्य की चिकित्सा पद्धतियों और नई दवाओं का आधार बनती हैं।

माइटोकॉन्ड्रिया की खासियत यह भी है कि इसमें अपना अलग डीएनए होता है, जो आमतौर पर मां से बच्चों में स्थानांतरित होता है। यह न केवल ऊर्जा उत्पादन करता है, बल्कि वसा और कार्बोहाइड्रेट को तोड़ने में मदद करता है और जरूरत पड़ने पर कोशिकाओं की नियंत्रित मृत्यु (अपोप्टोसिस) में भी भूमिका निभाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में माइटोकॉन्ड्रिया रिसर्च को बढ़ावा देकर और विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाकर भविष्य में कई जटिल बीमारियों के इलाज में नई संभावनाएं खोली जा सकती हैं।

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