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Parshuram Jayanti: भगवान परशुराम का जीवन साहस, ज्ञान, त्याग और न्याय का अनूठा संगम

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Parshuram Jayanti: भगवान परशुराम का जीवन साहस, ज्ञान, त्याग और न्याय का अनूठा संगम

रिपोर्ट: रवि डालमिया

नई दिल्ली में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भगवान परशुराम के अवतरण दिवस को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को जन्मे चिरंजीवी भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, जिनका जीवन धर्म, पराक्रम और न्याय की मिसाल के रूप में देखा जाता है।

इस अवसर पर श्री भीष्म लाल शर्मा चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से भगवान परशुराम को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। कार्यक्रम के दौरान ट्रस्ट के चेयरमैन राजीव शर्मा ने भगवान परशुराम के व्यक्तित्व और उनके जीवन मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन साहस, ज्ञान, त्याग और न्याय का अद्वितीय संगम है, जो आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

राजीव शर्मा ने कहा कि भगवान परशुराम का जन्म भले ही ब्राह्मण कुल में हुआ था, लेकिन उन्होंने शास्त्र और शस्त्र दोनों में अद्वितीय दक्षता हासिल की। वे वेदों के गहरे ज्ञाता होने के साथ-साथ एक पराक्रमी योद्धा भी थे, जिन्होंने हमेशा अन्याय और अधर्म के खिलाफ आवाज उठाई और उसे समाप्त करने के लिए संघर्ष किया।

उन्होंने आगे कहा कि भगवान परशुराम के जीवन से यह महत्वपूर्ण सीख मिलती है कि जब समाज में अन्याय, अहंकार और अधर्म बढ़ने लगे, तब मौन रहना उचित नहीं है, बल्कि साहस के साथ उसका विरोध करना चाहिए। उनका जीवन हमें निडर होकर सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान परशुराम के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की और समाज में उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और धार्मिक वातावरण में भगवान परशुराम के जीवन से जुड़ी प्रेरणाओं को साझा किया गया।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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