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AI Wildlife App: 8 साल के बच्चे ने AI से बनाया ‘Urban Wild Watch’, जंगली जानवरों से इंसानों की सुरक्षा में करेगा मदद

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AI Wildlife App: 8 साल के बच्चे ने AI से बनाया ‘Urban Wild Watch’, जंगली जानवरों से इंसानों की सुरक्षा में करेगा मदद

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बदल रहा है और अब बच्चे भी इसकी मदद से वास्तविक समस्याओं के समाधान तैयार कर रहे हैं। कनाडा में रहने वाले आठ वर्षीय वियोहन सयूरन ने AI की मदद से ‘Urban Wild Watch’ नाम का एक वेब ऐप तैयार किया है। इसका उद्देश्य रिहायशी इलाकों में जंगली जानवर दिखाई देने पर लोगों को सतर्क करना और साथ ही वन्यजीवों को मानवीय हस्तक्षेप से सुरक्षित रखना है।

वियोहन के आसपास के इलाके में कोयोटी और भालू जैसे जंगली जानवर दिखाई देने की घटनाओं ने उन्हें इस ऐप को बनाने के लिए प्रेरित किया। उनके मन में सवाल आया कि क्या ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है, जिसके जरिए पड़ोस के लोग वन्यजीवों की मौजूदगी के बारे में एक-दूसरे को समय रहते जानकारी दे सकें।

Urban Wild Watch पर लोग कोयोटी, भालू, लोमड़ी, हिरण और दूसरे वन्यजीव दिखाई देने की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा किसी घायल जानवर या भटके हुए वन्यजीव के बच्चे के बारे में भी जानकारी साझा की जा सकती है।

ऐप की खासियत यह है कि यह वन्यजीव की सटीक लोकेशन सार्वजनिक नहीं करता। इसके बजाय केवल सामान्य क्षेत्र की जानकारी दी जाती है। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि जानवर दिखाई देने की जानकारी मिलने पर लोग फोटो या वीडियो बनाने के लिए वहां भीड़ न लगाएं।

सटीक लोकेशन छिपाने का फैसला वन्यजीवों और इंसानों दोनों की सुरक्षा से जुड़ा है। अगर किसी भालू या कोयोटी की वास्तविक लोकेशन सार्वजनिक कर दी जाए तो उत्सुक लोग उसके आसपास पहुंच सकते हैं। इससे जानवर डर सकता है और मानव-वन्यजीव टकराव का खतरा बढ़ सकता है।

Urban Wild Watch को 5 जून 2026 को लॉन्च किया गया था। जुलाई तक कनाडा और अमेरिका से इस प्लेटफॉर्म पर 150 से अधिक wildlife sightings दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

वियोहन ने ऐप तैयार करने में AI आधारित टूल्स का इस्तेमाल किया। अपने विचार को व्यवस्थित करने के लिए Claude की सहायता ली गई, जबकि सामान्य भाषा में दिए गए निर्देशों को वेब ऐप में बदलने के लिए Lovable का उपयोग किया गया।

यह उदाहरण दिखाता है कि आधुनिक AI टूल्स की वजह से सॉफ्टवेयर तैयार करने की प्रक्रिया उन लोगों के लिए भी आसान हो रही है, जिनके पास पारंपरिक प्रोग्रामिंग का लंबा अनुभव नहीं है। उपयोगकर्ता सामान्य भाषा में अपनी जरूरत बता सकता है और AI आधारित डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म उसे कार्यशील प्रोजेक्ट में बदलने में सहायता कर सकते हैं।

वियोहन का ऐप केवल तकनीकी प्रयोग नहीं है। इसका उद्देश्य समुदाय के लोगों को वन्यजीवों की मौजूदगी की जानकारी देना और उन्हें सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए जागरूक करना है।

शहरी क्षेत्रों के विस्तार के साथ कई स्थानों पर इंसानों और वन्यजीवों का संपर्क बढ़ रहा है। ऐसे में समय पर जानकारी उपलब्ध होने से लोग सावधानी बरत सकते हैं। दूसरी तरफ सटीक लोकेशन छिपाकर जानवरों को अनावश्यक भीड़ और मानवीय हस्तक्षेप से बचाया जा सकता है।

महज आठ साल की उम्र में तैयार किया गया Urban Wild Watch इस बात का उदाहरण बनकर सामने आया है कि AI का उपयोग केवल जानकारी हासिल करने के बजाय वास्तविक दुनिया की समस्याओं के लिए समाधान तैयार करने में भी किया जा सकता है।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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