Noida Labour Protest: हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी की NSA हिरासत की रद्द, अप्रैल के हिंसक श्रमिक आंदोलन से जुड़ा है मामला

Noida Labour Protest: हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी की NSA हिरासत की रद्द, अप्रैल के हिंसक श्रमिक आंदोलन से जुड़ा है मामला

नोएडा। शहर में अप्रैल में हुए श्रमिक आंदोलन और उससे जुड़ी हिंसक घटनाओं का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत आकृति चौधरी की हिरासत को रद्द कर दिया है। पुलिस ने मई में आकृति चौधरी के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई की थी। पुलिस ने उन्हें मजदूर बिगुल दस्ता का सक्रिय सदस्य बताते हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा और आगजनी में भूमिका होने का आरोप लगाया था।

नोएडा में अप्रैल में वेतन बढ़ोतरी सहित विभिन्न मांगों को लेकर श्रमिकों ने आंदोलन किया था। 13 अप्रैल को बड़ी संख्या में मजदूर सड़कों पर उतरे थे और प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर हिंसक घटनाएं सामने आई थीं।

पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान 300 से अधिक कंपनियों के शीशे तोड़े जाने और दो दर्जन से अधिक वाहनों में आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आई थीं। पुलिस का दावा था कि आंदोलन के दौरान करीब 42 हजार मजदूर सड़कों पर उतरे थे।

हिंसक घटनाओं के बाद गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट के अलग-अलग थानों में मुकदमे दर्ज किए गए थे। इसके बाद पुलिस ने आंदोलन और हिंसा से जुड़े मामलों की जांच शुरू की और कई लोगों की भूमिका की पड़ताल की गई।

इसी मामले में नोएडा पुलिस ने 11 अप्रैल को आकृति चौधरी को बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया था। बाद में मई में उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।

पुलिस ने आकृति चौधरी को मजदूर बिगुल दस्ता का सक्रिय सदस्य बताया था। पुलिस का आरोप था कि श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और आगजनी में उनकी भूमिका रही और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को उकसाकर कानून-व्यवस्था प्रभावित करने का प्रयास किया।

जांच के दौरान पुलिस ने आकृति चौधरी की गतिविधियों को भड़काऊ बताते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने भीड़ को उग्र करने और लोक व्यवस्था को प्रभावित करने में सक्रिय भूमिका निभाई।

इसके बाद उनके खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई की गई थी। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनएसए के तहत उनकी हिरासत को रद्द कर दिया है।

आकृति चौधरी की ओर से मामले में पुलिस की कार्रवाई और एनएसए लगाए जाने का विरोध किया गया था। उनके अधिवक्ता रजनीश यादव का कहना है कि एनएसए लगाने के लिए पुलिस के पास पर्याप्त ठोस साक्ष्य नहीं थे।

अधिवक्ता रजनीश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार की आलोचना करने वालों के खिलाफ अतिरिक्त धाराओं का इस्तेमाल किया गया। बचाव पक्ष की ओर से एनएसए के तहत की गई कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी गई थी।

मामले की सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी की एनएसए हिरासत को रद्द कर दिया। हालांकि आदेश का विस्तृत आधार आधिकारिक प्रति सामने आने के बाद स्पष्ट हो सकेगा।

हाईकोर्ट के फैसले पर गौतमबुद्धनगर के अपर पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था राजीव नारायण मिश्रा ने कहा कि अदालत के आदेश का सम्मान किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि फिलहाल पुलिस को हाईकोर्ट के आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। आदेश की प्रति मिलने के बाद उसका अध्ययन किया जाएगा और उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

यह मामला अप्रैल में हुए श्रमिक आंदोलन के बाद से चर्चा में रहा है। आंदोलन के दौरान सामने आई हिंसा और आगजनी की घटनाओं को लेकर पुलिस ने अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू की थी।

अब आकृति चौधरी के खिलाफ एनएसए के तहत की गई हिरासत हाईकोर्ट से रद्द होने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। पुलिस की ओर से हाईकोर्ट का विस्तृत आदेश मिलने और उसका अध्ययन करने के बाद अगला कदम तय किया जाएगा।

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