POCSO Case: नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी दुकानदार को अदालत ने किया बरी, पीड़िता और माता-पिता ने नहीं किया आरोपों का समर्थन

POCSO Case: नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी दुकानदार को अदालत ने किया बरी, पीड़िता और माता-पिता ने नहीं किया आरोपों का समर्थन

नोएडा। नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में चल रहे मामले में पॉक्सो अदालत ने मथुरा निवासी आरोपी दुकानदार को बरी कर दिया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए तीनों प्रमुख गवाहों—पीड़िता, उसकी मां और पिता—ने अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। ऐसे में अदालत ने आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित नहीं माना और उसे दोषमुक्त कर दिया।

यह मामला सेक्टर-113 थाने में दर्ज किया गया था। पीड़िता के पिता ने 8 अप्रैल 2024 को पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि आरोपी उनका पड़ोसी है और सेक्टर-75 स्थित एक मॉल में दुकान चलाता था। शिकायत के मुताबिक त्योहारी सीजन में दुकान पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ने की बात कहते हुए आरोपी ने उनकी करीब 15 वर्षीय बेटी को कुछ दिनों के लिए दुकान पर मदद करने भेजने को कहा था।

बताया गया था कि किशोरी सुबह करीब दस बजे दुकान पर जाती थी और रात करीब साढ़े दस बजे वापस घर लौटती थी। शिकायत के अनुसार 7 अप्रैल 2024 की रात एक महिला ने पीड़िता के परिवार को फोन किया और स्पेक्ट्रम मॉल की कार पार्किंग में पहुंचने के लिए कहा। इसके बाद आरोप लगाया गया कि दुकानदार ने किशोरी के साथ कार के अंदर दुष्कर्म किया और उसे धमकी भी दी।

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच की और प्रकरण पॉक्सो अदालत तक पहुंचा। अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपों को साबित करने के लिए पीड़िता और उसके माता-पिता समेत तीन गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए गए। हालांकि सुनवाई के दौरान तीनों ने प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों का समर्थन नहीं किया।

पीड़िता की मां ने अदालत के सामने कहा कि उनकी बेटी घर पहुंचने में देरी होने के कारण घबराई हुई थी और आरोपी ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया था। वहीं पीड़िता के पिता ने भी दुष्कर्म या छेड़छाड़ की घटना से इनकार किया।

स्वयं पीड़िता ने अदालत में दिए बयान में कहा कि उसने आरोपी से उसे घर छोड़ने के लिए कहा था। उसके मुताबिक पार्किंग में केवल विवाद हुआ था और उसके साथ दुष्कर्म जैसी कोई घटना नहीं हुई थी। अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं करने के कारण अदालत ने तीनों गवाहों को पक्षद्रोही घोषित किया।

अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं किया जा सका है। इसके बाद आरोपी को मामले में दोषमुक्त कर दिया गया।

इसके साथ ही अदालत ने शिकायतकर्ता पिता के खिलाफ वाद पंजीकृत करने का भी आदेश दिया है। इस आदेश के बाद आरोपी को नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया गया।

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