Noida Authority: नाला और फुटओवर ब्रिज निर्माण में स्टील की गुणवत्ता पर उठे सवाल, जांच रिपोर्ट तक ठेकेदार का भुगतान रोका

Noida Authority: नाला और फुटओवर ब्रिज निर्माण में स्टील की गुणवत्ता पर उठे सवाल, जांच रिपोर्ट तक ठेकेदार का भुगतान रोका
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सेक्टर-51 और 52 मेट्रो स्टेशन के बीच बन रहे फुटओवर ब्रिज (एफओबी) तथा सेक्टर-50 और 51 के बीच निर्माणाधीन आरसीसी नाले के निरीक्षण के दौरान इस्तेमाल की जा रही स्टील की गुणवत्ता पर संदेह जताया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण ने स्टील के नमूने लेकर उनकी जांच देश की प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थाओं से कराने का निर्णय लिया है। साथ ही जांच रिपोर्ट आने तक संबंधित ठेकेदार का भुगतान भी रोक दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक (सिविल) एसपी सिंह ने निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि दोनों परियोजनाओं में यूरोथर्म (राठी स्टील) और सेल (SAIL) की स्टील का उपयोग किया जा रहा है। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर तकनीकी ऑडिट सेल को मौके से स्टील के नमूने एकत्र करने और उन्हें स्वतंत्र जांच के लिए आईआईटी दिल्ली, आईआईटी रुड़की अथवा श्रीराम इंस्टीट्यूट जैसी मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थाओं में भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने तक संबंधित ठेकेदार का भुगतान नहीं किया जाएगा। यदि जांच में यह पाया जाता है कि इस्तेमाल की गई स्टील निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरती, तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही इस परियोजना की निगरानी कर रहे संबंधित प्रबंधक से भी तीन कार्य दिवस के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
इस पूरे मामले ने प्राधिकरण की गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि स्टील की गुणवत्ता को लेकर संदेह था तो निर्माण कार्य शुरू होने से पहले या निर्माण सामग्री के साइट पर पहुंचते ही उसकी जांच क्यों नहीं कराई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि करोड़ों रुपये की सार्वजनिक परियोजनाओं में पहले निर्माण कार्य शुरू कर देना और बाद में गुणवत्ता परीक्षण कराना निगरानी व्यवस्था की गंभीर खामी को दर्शाता है।
नोएडा प्राधिकरण ने इस घटना के बाद भविष्य के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। वर्क सर्किल-1 से लेकर वर्क सर्किल-5 तक के अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि सीमेंट, स्टील, बिटुमिन सहित सभी निर्माण सामग्री का उपयोग केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप ही किया जाए। साथ ही भविष्य में स्वतंत्र तकनीकी संस्थाओं से गुणवत्ता परीक्षण की पुष्टि होने के बाद ही ठेकेदारों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
अधिकारियों के अनुसार, आरसीसी नाले का निर्माण कार्य करीब तीन महीने पहले शुरू हुआ था और वर्तमान में निर्माण कार्य जारी है। महाप्रबंधक द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई और भुगतान संबंधी निर्णय लिया जाएगा। यदि रिपोर्ट में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।





