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Noida accident: नोएडा में इंजीनियर की दर्दनाक मौत, हादसा या प्राधिकरण की लापरवाही पर उठे सवाल

Noida accident: नोएडा में इंजीनियर की दर्दनाक मौत, हादसा या प्राधिकरण की लापरवाही पर उठे सवाल

नोएडा के सेक्टर-150 में एक दर्दनाक सड़क हादसे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घने कोहरे के बीच गुरुग्राम से नोएडा लौट रहे युवराज अपनी ग्रैंड विटारा कार से सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरिका पार्क की ओर जा रहे थे। एटीएस ले ग्रांड के पास उनकी कार नाले की दीवार को तोड़ते हुए एक खाली प्लॉट में जा गिरी, जहां करीब 70 फीट तक पानी भरा हुआ था। पानी में डूबने से युवराज की मौके पर ही मौत हो गई।

हादसे के बाद स्थानीय निवासियों में आक्रोश फैल गया। लोगों का आरोप है कि यह हादसा नहीं, बल्कि नोएडा प्राधिकरण की घोर लापरवाही का नतीजा है। जिस स्थान पर दुर्घटना हुई, वहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग की गई और न ही रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेत लगाए गए। घने कोहरे में रास्ता साफ नजर न आने के कारण युवराज को आगे मौजूद नाले और खाली प्लॉट का अंदाजा नहीं हो सका और उनकी कार सीधे पानी से भरे क्षेत्र में जा गिरी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्लॉट सेक्टर-150 का एससी-02 है, जो अभी खाली है और भविष्य में यहां निर्माण प्रस्तावित है। लंबे समय से इस प्लॉट में पानी भरा हुआ है, जो अब दलदल का रूप ले चुका है। हादसे के बाद जब लोगों ने विरोध जताया तो प्राधिकरण ने आनन-फानन में देर शाम घटनास्थल के पास सैकड़ों टन मलबा डाल दिया। आरोप है कि यह कार्रवाई हादसे के बाद अपनी लापरवाही छिपाने के लिए की गई।

निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद प्राधिकरण द्वारा वहां डायवर्जन बोर्ड लगाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन स्थानीय लोगों के प्रदर्शन के कारण बोर्ड नहीं लगाया जा सका। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई होती तो एक युवा इंजीनियर की जान बचाई जा सकती थी।

परिजनों का आरोप है कि हादसा रात करीब 12 बजे हुआ, लेकिन सहायता और बचाव कार्य में काफी देरी हो गई। अगर समय पर मदद पहुंचती तो शायद युवराज को बचाया जा सकता था। इस घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है और लोग प्राधिकरण की जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि यह घटना महज एक हादसा थी या फिर सिस्टम की लापरवाही ने एक होनहार इंजीनियर की जान ले ली।

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