
New Delhi Desk : बिखरा हुआ , क्षत, वीक्षत, अर्धविक्षिप्त , निराश, हताश, परेशान इंडी गठबंधन जो पश्चिम बंगाल को ममता के नेतृत्व में अपना सबसे मजबूत किला समझता था उसे तुष्टिकरण और टीएमसी की गुंडागर्दी का बंगाल की जनता ने दशकों में ऐसा अभूतपूर्व सबक सिखाया है कि उस झन्नाटेदार तमाचे से इंडी गठबंधन का कोई भी दल अभी तक संभल ही नहीं पा रहा । कोई भी सही आंकलन और विश्लेषण नहीं कर पा रहा है। अपने अपने तरीके से अँधेरे में तीर चलाकर सोच रहे हैं की 2027 के विधान सभा चुनावों में हम भाजपा/एनडीए को चुनौती दे देंगे।
सबसे पहले तो इंडी के सभी दलों को सोचना चाहिए कि बंगाल /केरलम में इंडी गठबंधन कहाँ था? बंगाल में इंडी के तीन मुख्य दलों कांग्रेस, टीएमसी और सीपीएम ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा और सभी हारे । केरलम में कांग्रेस और कम्युनिस्ट एक दूसरे से लड़े और कांग्रेस की नैया मुस्लिम लीग ने पार लगाई । ऐसी स्थिति में इंडी का हार का विश्लेषण कैसे निष्पक्ष और स्वतंत्र हो सकता है ।
बंगाल में हिंदुओं ने अपने पर पिछले पचास साल में हुए अत्याचारों का बदला तो लिया ही लेकिन जिस आतंक और अत्याचार के बल पर कम्युनिस्ट और टीएमसी चुनाव जीतती थी उसे चुनाव आयोग ने और सुरक्षा बलों ने इस बार चलने ही नहीं दिया । निष्पक्ष चुनाव हुए और भाजपा बहुत बड़े अंतर से जीत गई।
सबसे बड़ा 2027 का चुनाव उत्तर प्रदेश में होने वाला है। अखिलेश और समाजवादी बंगाल चुनाव के बाद बेहद घबराए हुए है, कुछ समझ नहीं पा रहे। सब कुछ आजमा रहे हैं। राम भक्तों पर गोलिया चलवाने वाली पार्टी, रामायण को जलाने वाली पार्टी, मुस्लिमों का तुष्टिकरण करने वाली पार्टी, माफियाओं को संरक्षण देने वाली पार्टी अब छद्म सॉफ्ट हिंदुत्व का दिखावा कर रही गई, मंदिर में चुनावी आरती कर रही है, लंगर लगवा रही है, रामायण बँटवा रही है। पीडीए की चैंपियन बनने का असफल प्रयास कर रही है । राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के अनुसार अखिलेश के मुख्यमंत्री रहते लगभा 58,000 अत्याचार और हत्याएं ओबीसी, अनुसूचित जातियों, पिछड़ों , अति पिछड़ों और दलितों पर हुए । उस समय इन्होंने सिर्फ यादवों के लिए काम किया और अब चुनाव जीतने के लिए इन्हें पीडीए की याद आ रही है। अखिलेश को याद रखना चाहिए की जनता की यारदास्त इतनी कमजोर नहीं होती । पहले अखिलेश को अपने पापों का प्रायश्चित कर जनता से माफ़ी माँगनी चाहिए ।
कांग्रेस का बोझ अपने कंधों से उतारना चाहिए। आज भी राहुल ने प्रधानमंत्री के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए कहा की आपका प्रधानमंत्री गद्दार है। जैसे प्रधानमंत्री उनके नहीं हैं। देश ऐसी भाषा पसंद नहीं करता इसलिए कांग्रेस जिसे भी छूती है उसे ले डूबती है।
हर तंत्र , मंत्र और यंत्र का प्रयोग कर भी कांग्रेस अपने ही कारणों से हार रही है और यदि नहीं बदली तो इनका भाग्य कोई बदल नहीं सकता । इंडी गठबंधन का हर दल कोई ना कोई बहाना बनाकर कांग्रेस से मुक्ति चाहता है ।
देश की नब्ज सिर्फ भाजपा और एनडीए ने समझी है बाक़ी इनकी नक़ल कर रहे हैं। बंगाल से कुछ नहीं सीखा है ।
राकेश शर्मा





