New Delhi : रक्षाबंधन पर दिल्ली में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कार्यक्रम में भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया। ऐवान-ए-गालिब स्थित गालिब ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में मुस्लिम बहनों ने इंद्रेश कुमार की कलाई पर राखी बांधी और इसके बाद महिलाओं ने तिरंगा यात्रा में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में संदेश दिया गया कि अलग अलग पहचान के बावजूद भारत की साझा पहचान सभी को एक सूत्र में जोड़ती है।

कार्यक्रम में इंद्रेश कुमार के साथ राष्ट्रीय संयोजकों की टीम, दिल्ली प्रदेश के संयोजक, सह संयोजक, विभिन्न प्रकोष्ठों के संयोजक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। आयोजन में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन समुदायों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। मोहम्मद अफजल, गिरीश जुयाल, शालिनी अली, हाफिज साबरीन, इमरान चौधरी, अनिल गर्ग, फैज खान, फैज अहमद फैज और शाकिर अली सहित कई लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम में राखी बांधने की परंपरा को सामाजिक संदेश से जोड़ा गया। मुस्लिम बहनों द्वारा रक्षा सूत्र बांधना विश्वास, स्नेह, सम्मान और भाईचारे का प्रतीक बना। आयोजन का संदेश रहा कि मानवीय रिश्तों को धर्म, जाति या सामाजिक पहचान की सीमाओं में नहीं बांधा जाना चाहिए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इंद्रेश कुमार ने शांति, सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और विविधता में एकता पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से मतभेदों से ऊपर उठकर एक दूसरे का सम्मान करने और ऐसे भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया जहां अलग धर्म, भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं विभाजन का कारण न बनें बल्कि देश की ताकत बनें।
इंद्रेश कुमार का संदेश आज की युवा पीढ़ी के संदर्भ में खास बताया गया। Gen Alpha और Gen Z का जीवन डिजिटल दुनिया से जुड़ा है। सोशल मीडिया ने उन्हें अलग संस्कृतियों और विचारों से जोड़ा है लेकिन इसी दुनिया में कटुता, ट्रोलिंग, नफरत, गलत सूचनाओं और सामाजिक दूरी जैसी चुनौतियां भी हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या युवा मानवीय स्तर पर एक दूसरे को समझने और सम्मान देने में भी उतनी ही तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
कार्यक्रम में शालिनी अली ने महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता पर बात रखी। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि जब महिलाएं शिक्षित और आत्मनिर्भर होती हैं तो इसका सकारात्मक असर परिवार से लेकर समाज और राष्ट्र तक दिखता है।
रक्षाबंधन कार्यक्रम के बाद निकली तिरंगा यात्रा में महिलाओं ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर हिस्सा लिया। इसके जरिए संदेश दिया गया कि राष्ट्र निर्माण किसी एक वर्ग या समुदाय की जिम्मेदारी नहीं है और देश की प्रगति में महिलाओं की बराबर भूमिका है। तिरंगा यात्रा से यह भी संदेश गया कि राष्ट्रीय ध्वज किसी एक धर्म या क्षेत्र की पहचान नहीं बल्कि हर भारतीय की साझा पहचान और एकता का प्रतीक है।
कार्यक्रम का समापन शांति, सामाजिक सद्भाव, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय एकता के संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों ने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता में है और उसकी एकता आपसी सम्मान में है।

