Nepal Flood Disaster: नेपाल में बाढ़ से 669 लोगों की मौत, 2426 लापता; चीन से नेपाल पहुंचे 120 भारतीय, राहत-बचाव अभियान तेज
काठमांडू। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और फ्लैश फ्लड से तबाही लगातार बढ़ती जा रही है। नेपाल सरकार की ओर से शनिवार शाम जारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 669 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2426 लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। इस आपदा में करीब 30 देशों के नागरिकों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। भारत ने भी पड़ोसी देश की मदद के लिए राहत सामग्री के साथ विशेषज्ञ और तकनीकी टीमें भेजनी शुरू कर दी हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कई दिनों से लोगों की तलाश जारी है। बड़ी संख्या में लोगों के अब भी लापता होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। कई इलाकों में बाढ़ और मलबे के कारण राहत टीमों को पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल सरकार की ओर से जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार शनिवार शाम तक 669 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और लापता लोगों की संख्या 2426 बताई गई है। राहत और बचाव एजेंसियां प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने और लापता लोगों की तलाश करने में जुटी हैं।
इस आपदा में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। इनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। कई भारतीय पर्यटक सुरक्षित वापस लौट चुके हैं, जबकि कुछ भारतीयों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाने की जानकारी सामने आई है। नेपाल से सुरक्षित लौटे कई भारतीयों ने बाढ़ की भयावहता और अपने सामने आए हालात का जिक्र किया है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक शनिवार को 120 भारतीय नागरिक चीन की ओर से नेपाल पहुंचने में सफल रहे। ये लोग आपदा के कारण प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हुए थे। भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी और उनसे संपर्क स्थापित करने के लिए भारतीय एजेंसियां नेपाल और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर रही हैं।
वहीं भारतीय नागरिकों के अब भी लापता या संपर्क से बाहर होने को लेकर चिंता बनी हुई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर नेपाल में भारतीय नागरिकों की तलाश और राहत-बचाव अभियान को और व्यापक बनाने की मांग की है।
थरूर ने अपने पत्र में विदेश मंत्रालय से उपलब्ध जानकारी का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा था। इनमें भारतीय मूल के लोग भी शामिल बताए गए। इसके अलावा चीन की तरफ भी सैकड़ों लोगों के फंसे होने की बात कही गई, जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े तीर्थयात्री भी शामिल हैं।
कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार से नेपाल में पूरी NDRF टीम भेजने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिस स्तर की तबाही सामने आई है, उसे देखते हुए खोज और बचाव अभियान में अधिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
उन्होंने भारी क्षमता वाले हेलिकॉप्टर तैनात करने का भी आग्रह किया, ताकि दुर्गम और सड़क संपर्क से कट चुके इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाई जा सके और वहां फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।
थरूर ने कहा कि मलबे के भीतर अब भी लोगों के जीवित होने की संभावना को देखते हुए राहत अभियान में समय बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने केंद्र से उपलब्ध सभी आधुनिक संसाधनों का तत्काल इस्तेमाल करने की मांग की।
कांग्रेस सांसद ने भारतीय सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स को अर्थमूविंग मशीनों के साथ तैनात करने का सुझाव भी दिया। उनका कहना है कि भारी मलबे को हटाने और बाधित रास्तों को खोलने के लिए बड़े उपकरणों की आवश्यकता है।
उन्होंने पसांग ल्हामू हाईवे को दोबारा खोलने के लिए भारत की ओर से पेश किए गए बेली ब्रिजों का इस्तेमाल करने की मांग भी की। बाढ़ और भूस्खलन से सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण कई क्षेत्रों तक राहत टीमों की पहुंच मुश्किल बनी हुई है।
शशि थरूर ने राहत एवं बचाव कार्यों में आधुनिक तकनीक के अधिक इस्तेमाल की भी मांग की। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार, थर्मल इमेजिंग उपकरण, प्रशिक्षित खोजी कुत्तों और सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है।
उन्होंने विशेष रूप से तिमुरे से रसुवागढ़ी तक के क्षेत्र में लगातार और केंद्रित खोज अभियान चलाने पर जोर दिया। इस इलाके में फंसे और लापता लोगों का पता लगाने के लिए विशेष बचाव दल तैनात करने की मांग की गई है।
नेपाल में आई इस आपदा को लेकर भारत सरकार ने भी चिंता जताई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि नेपाल के संकट को लेकर भारत चिंतित है और पड़ोसी देश को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि नेपाल इस संकट का सामना अकेले नहीं कर रहा है। भारत जरूरत के समय अपने पड़ोसी देश के साथ खड़ा है और राहत सामग्री भेजी जा रही है।
भारत की ओर से केवल राहत सामग्री ही नहीं, बल्कि विशेष तकनीकी और विशेषज्ञ टीमें भी नेपाल भेजी जा रही हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक मृतकों के अवशेषों की पहचान में सहायता के लिए भारतीय फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीमें काठमांडू पहुंचने वाली हैं।
इन विशेषज्ञों का मुख्य काम मृतकों के अवशेषों की पहचान के लिए डीएनए नमूनों के विश्लेषण में नेपाली अधिकारियों की सहायता करना होगा। आपदा के बड़े पैमाने और कई शवों की पहचान में आ रही कठिनाइयों को देखते हुए फोरेंसिक सहायता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके साथ भारत की एक विशेष तकनीकी टीम सुरंग से जुड़े बचाव अभियान की स्थिति का जायजा लेने के लिए काठमांडू पहुंच चुकी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार टीम ने प्रभावित क्षेत्र में काम भी शुरू कर दिया है।
तकनीकी टीम मौके की परिस्थितियों का आकलन कर रही है। उसकी सिफारिशों के आधार पर भारत की एक विशेष टनल रेस्क्यू टीम को जरूरी उपकरणों के साथ नेपाल भेजे जाने की तैयारी है। यह टीम सुरंग या उसके आसपास फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान में नेपाली एजेंसियों की सहायता करेगी।
नेपाल में आई बाढ़ से प्रभावित भारतीयों की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। चीन से 120 भारतीय नागरिकों के नेपाल पहुंचने को राहत अभियान में महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों से संपर्क स्थापित करने की कोशिशें अभी जारी हैं।
वहीं नेपाल में लापता लोगों की कुल संख्या 2400 से अधिक होने के कारण बचाव एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई प्रभावित क्षेत्रों में मलबा, क्षतिग्रस्त सड़कें और बाधित संपर्क राहत कार्यों को मुश्किल बना रहे हैं।
नेपाल सरकार की एजेंसियों के साथ विभिन्न देशों की सहायता टीमें भी राहत और बचाव प्रयासों में सहयोग कर रही हैं। भारत की ओर से राहत सामग्री, तकनीकी विशेषज्ञता, फोरेंसिक सहायता और विशेष रेस्क्यू टीम उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान का सबसे बड़ा लक्ष्य लापता लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचना है। शनिवार शाम तक 669 लोगों की मौत की पुष्टि और 2426 लोगों के लापता होने के आंकड़े ने इस आपदा की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। आने वाले समय में बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ हताहतों और लापता लोगों से जुड़े आंकड़ों में बदलाव हो सकता है।


