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नई दिल्ली: राष्ट्रीय धरोहर हैं पूर्व सैनिक : राजनाथ सिंह

नई दिल्ली: -वर्दी में राष्ट्र की सेवा और सेवानिवृत्ति के बाद समाज की सेवा में योगदान दे रहे पूर्व सैनिक

-दशकों का अनुभव, नेतृत्व, अनुशासन और रणनीतिक सोच के जरिये समाज को करते हैं लाभान्वित
नई दिल्ली, 30 सितम्बर :रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पूर्व सैनिकों की उपलब्धियां न केवल साथी पूर्व सैनिकों, बल्कि युवाओं को भी समर्पण और निष्ठा के साथ राष्ट्र की सेवा करने के लिए प्रेरित करती हैं।

उन्होंने आगे कहा, पूर्व सैनिक एक राष्ट्रीय संपत्ति हैं, जो दशकों के अनुभव, नेतृत्व, अनुशासन और रणनीतिक सोच को समाज में लाते हैं। सामाजिक और आर्थिक पहलों में उनकी निरंतर भागीदारी समुदायों और समग्र रूप से राष्ट्र को मजबूत बनाती है। वह, रक्षा मंत्रालय के तहत भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग (डीईएसडब्ल्यू) द्वारा नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित नेशनल कॉन्क्लेव 2025 में बोल रहे थे।

राजनाथ सिंह ने युवाओं का मार्गदर्शन करने, सामाजिक विघटन को रोकने और नशीली दवाओं के दुरुपयोग जैसी चुनौतियों से निपटने में पूर्व सैनिकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। पूर्व सैनिकों का अनुभव, अनुशासन और नेतृत्व उन्हें समुदायों पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा, कार्यक्रम में उपस्थित कई पूर्व सैनिकों ने न केवल वर्दी में देश की सेवा की है, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने कार्यों के माध्यम से अपनी सेवा जारी रखी है। हमारे पूर्व सैनिकों ने वास्तव में इस आदर्श वाक्य को साकार किया है कि एक बार सैनिक, हमेशा सैनिक।

रक्षा मंत्री ने सामुदायिक विकास, जनभागीदारी परियोजनाओं, पर्यावरण संरक्षण और युवाओं के मार्गदर्शन में पूर्व सैनिकों के योगदान पर प्रकाश डाला। तालाबों या मंदिरों के निर्माण के लिए सामूहिक रूप से काम करने वाले ग्रामीणों के उदाहरणों का हवाला देते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पूर्व सैनिक समुदायों को संगठित कर सकते हैं और खासकर उन क्षेत्रों में एकता, सामाजिक सामंजस्य और सहभागी शासन को बढ़ावा दे सकते हैं, जहां सरकार की पहुंच सीमित हो सकती है। उन्होंने कहा, पूर्व सैनिक समाज में विश्वास, एकता और सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे सामाजिक लचीलापन और स्थिरता मजबूत होती है।

पूर्व सैनिकों के सामने आने वाली चुनौतियों को स्वीकार करते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि पेंशन संबंधी चिंताओं, सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं और सीमित रोजगार के अवसरों जैसे मुद्दों का समाधान किया जा रहा है। सरकार आधुनिक तकनीक और सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं के माध्यम से स्मार्ट कैंटीन कार्ड, पूर्व सैनिक पहचान पत्र, डीजीआर सेवाओं तक ऑनलाइन पहुंच और पेंशन प्रबंधन के लिए स्पर्श पोर्टल जैसी पहल के जरिये पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इस अवसर पर सीडीएस जनरल अनिल चौहान, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवाएं) डॉ. मयंक शर्मा, पूर्व सैनिक और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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