पटना/नई दिल्ली: पटना में कृषि सलाहकार संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

पटना/नई दिल्ली, 4 अक्टूबर 2025 केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज पटना में आयोजित कृषि सलाहकार संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया। यहां उन्होंने कहा कि सरकार ने कृषि सलाहकारों की जरूरत और मूल्य दोनों को पहचाना और उनके सम्मान एवं हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम में, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय था जब भारत अमेरिका से पी.एल.–480 लाल गेहूँ आयात करता था, किंतु आज की स्थिति यह है कि देश के भंडार गेहूँ और चावल से भरे हुए हैं और भारत अन्य देशों को भी अनाज निर्यात कर रहा है। इसमें किसानों की कड़ी मेहनत और कृषि सलाहकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। शिवराज सिंह ने कृषि सलाहकारों की सराहना करते हुए कहा कि यदि सलाहकार न हों तो अनुसंधान प्रयोगशालाओं की उपलब्धियां जमीन तक नहीं पहुँच पाएंगी।

शिवराज सिंह ने बिहार में दलहन और मक्का उत्पादन की संभावनाओं पर विशेष बल दिया और कहा कि दलहन मिशन के माध्यम से देश को दालों में भी आत्मनिर्भर बनाया जाएगा और इसमें कृषि सलाहकारों की अहम भूमिका होगी। उन्होंने हाल ही में मंत्रिमंडल द्वारा किसानों के हित में घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि की भी जानकारी दी।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के नेतृत्व में ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ के अंतर्गत उत्पादकता में कमी वाले जिलों को विशेष फोकस में रखा गया है, जिसमें बिहार के भी कई जिले शामिल हैं। इस योजना के तहत 11 विभाग मिलकर सामूहिक रूप से कार्य करेंगे।

शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री श्री मोदी की नीति ‘राष्ट्रहित सर्वोपरि’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अपने किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि भारत आज स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में अपनी शर्तों पर आगे बढ़ रहा है।

बिहार के किसानों की उपलब्धियों को सराहते हुए उन्होंने कहा कि राज्य कई फसलों में अग्रणी है और आने वाले समय में कृषि ही भारत की समृद्धि का सबसे बड़ा आधार बनेगी। इस अवसर पर बिहार के उप मुख्यमंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा सहित बड़ी संख्या में सलाहकार, किसान, वैज्ञानिक आदि उपस्थित थे।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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