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नई दिल्ली: 1500 पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे डिवाइस से टीबी जांच को मिलेगी रफ्तार

नई दिल्ली: -फिलहाल 473 डिवाइस के जरिये विभिन्न राज्यों में हो रही टीबी की जांच

नई दिल्ली, 09 जुलाई : टीबी मुक्त भारत पहल के तहत केंद्र सरकार ने लगभग 1500 नए पोर्टेबल एक्स-रे हैंडहेल्ड डिवाइस की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे जहां देशभर में टीबी (क्षय रोग) की समय रहते पहचान की जा सकेगी। वहीं उपचार में भी तेजी लाई जा सकेगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, यह खरीद केंद्रीय स्तर पर की जाएगी ताकि राज्यों और जिलों को जरूरत के हिसाब से तेजी से यह डिवाइस उपलब्ध कराए जा सकें। दरअसल, टीबी की जांच में, खासतौर पर गैर लक्षणों वाले मामलों में एक्स-रे इमेज के जरिये जांच की जाती है। यह एक अहम चिकित्सा जांच प्रक्रिया है। परंपरागत एक्स-रे मशीनें अस्पतालों तक ही सीमित होती हैं। उन्हें ग्रामीण या दुर्गम इलाकों में पहुंचा पाना मुश्किल होता है। ऐसे में हैंडहेल्ड पोर्टेबल एक्स-रे मशीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, मोबाइल वैनों और सामुदायिक स्वास्थ्य अभियानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही हैं।

केंद्रीय टीबी प्रभाग (सीटीडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी तक केंद्र सरकार की ओर से सभी राज्यों को कुल 473 एक्सरे डिवाइस उपलब्ध कराए गए हैं लेकिन जल्द ही 1500 नए डिवाइस खरीदे जाएंगे और फिर उनकी आपूर्ति की जाएगी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत पहले ही कुछ राज्यों को ये डिवाइस पायलट आधार पर सौंपे गए हैं। अब इनकी सफलता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय इसका दायरा बढ़ाने जा रहा है। यह प्रयास भारत को 2025 तक टीबी उन्मूलन के लक्ष्य के करीब ला सकता है।

अधिकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार की इस आपूर्ति से टीबी संक्रमण प्रभावित जिलों में मरीजों की स्क्रीनिंग काफी तेज होगी। साथ ही घर-घर जाकर जांच की सुविधा मिल सकेगी। इतना ही नहीं रेडियोलॉजिस्ट की मदद से तुरंत टीबी के बैक्टीरिया की पहचान हो पाएगी क्योंकि इस डिवाइस में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल किया गया है। हाल ही में नीति आयोग और आईसीएमआर ने सुझाव दिया कि टीबी जैसे संक्रामक रोगों की त्वरित पहचान के लिए मोबाइल और डिजिटल तकनीकों का अधिक उपयोग होना चाहिए। इन मशीनों के ज़रिए रीयल टाइम डेटा कलेक्शन, क्लाउड स्टोरेज और टेली रेडियोलॉजी संभव होती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा, टीबी नियंत्रित करने की दिशा में निदान के अंतर को खत्म करना बहुत जरूरी है। केंद्र सरकार का यह कदम टीबी खोज में टेक्नोलॉजी-ड्रिवन अप्रोच को मजबूत करेगा और उन मरीजों तक पहुंचने में मदद करेगा जो अब तक जांच से बाहर रह जाते थे। उन्होंने ये भी कहा कि नई तकनीकों का दूरदराज क्षेत्र तक विस्तार और टीका की खोज तेज करने के क्षेत्र में भारत वैश्विक रोल मॉडल बन सकता है।

टीबी मुक्त भारत के लिए महाराष्ट्र बना रोल मॉडल
केंद्रीय टीबी प्रभाग की ओर से साझा जानकारी में बताया गया कि बीते दो साल में देश की करीब 50 हजार ग्राम पंचायत टीबी मुक्त हुई हैं। सभी राज्यों में कुल 46118 ग्राम पंचायतों में टीबी संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है। इनमें महाराष्ट्र शीर्ष पर है जबकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड पहले पांच राज्यों की सूची में शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में समुदाय आधारित भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 2023 में यह योजना शुरू की थी। ग्राम पंचायतों को तब ‘टीबी मुक्त’ घोषित किया जाता है जब गांव में कोई सक्रिय टीबी रोगी नहीं हो या फिर पिछले टीबी रोगियों में सभी का इलाज सफल हो चुका हो।

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