
Metaverse Simulation: मेटावर्स सिमुलेशन से स्त्री एवं प्रसूति रोग प्रशिक्षण में डिजिटल क्रांति, चिकित्सा शिक्षा को मिली नई दिशा
नई दिल्ली, 18 जनवरी। स्त्री एवं प्रसूति रोग के क्षेत्र में मेटावर्स सिमुलेशन पवेलियन एक अत्याधुनिक तकनीकी मंच के रूप में तेजी से उभर रहा है, जो चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण के स्वरूप को पूरी तरह बदल रहा है। वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी आधारित यह डिजिटल प्लेटफॉर्म डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को सुरक्षित, नियंत्रित और अत्यंत यथार्थवादी वातावरण में जटिल चिकित्सीय प्रक्रियाओं का अभ्यास करने का अवसर प्रदान कर रहा है। इसके माध्यम से बिना किसी वास्तविक मरीज को जोखिम में डाले प्रसव, आपात स्थितियों और जटिल शल्य प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण संभव हो पा रहा है।
एम्स की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ और फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया की सचिव डॉ. के. अपर्णा शर्मा ने बताया कि एआईसीओजी 2026 के तहत स्थापित मेटावर्स सिमुलेशन पवेलियन की सबसे बड़ी खासियत इसका सुरक्षित प्रशिक्षण वातावरण है। यहां डॉक्टर प्रसव प्रबंधन, जटिल सर्जरी और लेप्रोस्कोपिक प्रक्रियाओं का अभ्यास वास्तविक मरीज के बिना कर सकते हैं। थ्रीडी सिमुलेशन तकनीक के जरिए अंगों की संरचना, भ्रूण के विकास और विभिन्न चिकित्सीय स्थितियों को वास्तविक समय में समझना संभव होता है, जिससे चिकित्सकों की व्यावहारिक समझ और तकनीकी कौशल में उल्लेखनीय सुधार आता है।
यह डिजिटल मंच सहयोगात्मक शिक्षा को भी बढ़ावा दे रहा है, जहां देश और दुनिया के अलग-अलग स्थानों पर मौजूद विशेषज्ञ एक ही आभासी पवेलियन में जुड़कर प्रशिक्षण ले सकते हैं और जटिल मामलों पर चर्चा कर सकते हैं। वर्ष 2026 तक मेटावर्स सिमुलेशन का उपयोग तकनीकी दक्षता के मूल्यांकन, डिजिटल ट्विन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से स्त्री स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी बनाने में किया जा रहा है। इससे न केवल चिकित्सा प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर हो रही है, बल्कि भविष्य में इलाज की सफलता दर बढ़ने की भी उम्मीद है।
आरएमएल अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा प्रुथी टंडन ने कहा कि मेटावर्स सिमुलेशन पवेलियन स्त्री एवं प्रसूति रोग के प्रशिक्षण को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है। यह तकनीक डॉक्टरों के कौशल को निखारने के साथ-साथ मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाएगी। बेहतर प्रशिक्षित डॉक्टर आपात स्थितियों में अधिक सटीक और त्वरित निर्णय ले सकेंगे, जिससे मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलेगी।
डॉ. कामना दत्ता ने बताया कि एआईसीओजी 2026 के दौरान महिला रोग विशेषज्ञों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। इसके साथ ही 18 से अधिक प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप और सात पब्लिक हेल्थ फोरम का आयोजन किया गया, जिनमें सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन, महिलाओं के खिलाफ हिंसा, ट्रांसजेंडर स्वास्थ्य, सुरक्षित मातृत्व, महिला स्वास्थ्य नीति और चिकित्सा नवाचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में फोगसी के अध्यक्ष डॉ. भास्कर पाल, आरएमएल अस्पताल के निदेशक डॉ. अशोक कुमार, डॉ. कामना दत्ता और डॉ. शारदा पात्रा सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक और विशेषज्ञ उपस्थित रहे। मेटावर्स सिमुलेशन पवेलियन को स्त्री स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल युग की एक बड़ी छलांग के रूप में देखा जा रहा है।
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