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नई दिल्ली: पनडुब्बी विनाशक आईएनएस अर्नाला नौसेना में शामिल

नई दिल्ली: -सोलह स्वदेशी एंटी-सबमरीन शैलो वाटर क्राफ्ट में से पहला युद्धपोत है अर्नाला

नई दिल्ली, 18 जून : अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर सूट से लैस आईएनएस अर्नाला बुधवार को नौसेना के बेड़े में शामिल हो गया। यह भारत को मिलने वाले 16 स्वदेशी पनडुब्बी विनाशक युद्धपोतों में से पहला युद्धपोत है जिसे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान की मौजूदगी में नौसेना डॉकयार्ड, विशाखापत्तनम में कमीशन किया गया है।

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यह एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट, एंटी-सबमरीन ऑपरेशन के लिए डिज़ाइन किया गया है। आईएनएस अर्नाला सब-सरफेस सर्विलांस और इंटरडिक्शन, सर्च और रेस्क्यू मिशन और लो-इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशन करने के लिए सुसज्जित है। 1490 टन से अधिक के सकल टन भार वाला यह 77 मीटर लंबा युद्धपोत डीजल इंजन-वाटर जेट संयोजन द्वारा संचालित होने वाला सबसे बड़ा भारतीय नौसेना युद्धपोत है।

अर्नाला कमीशनिंग समारोह में सीडीएस चौहान ने कहा, भारतीय नौसेना अब ‘खरीदार नौसेना’ से ‘निर्माता नौसेना’ बन गई है जिसके तहत भारत जहाज निर्माण के क्षेत्र में एक दुर्जेय शक्ति के रूप में उभरा है। स्वदेशी युद्धपोतों में अब अत्याधुनिक घरेलू प्रणालियां हैं, जिनमें स्टील्थ तकनीक से लेकर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट और उन्नत सेंसर शामिल हैं, जो युद्ध की तैयारियों को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाते हैं और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को उत्तरोत्तर साकार करते हैं।

इस एंटी सबमरीन वारफेयर का नाम महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय किले के नाम पर आईएनएस अर्नाला रखा गया है जो नौसेना में शामिल होकर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में नौसेना की क्षमता में इजाफा करेगा। इस दौरान पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, प्रतिष्ठित नागरिक, तत्कालीन अर्नाला के पूर्व कमांडिंग अधिकारी, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) और लार्सन एंड टूब्रो शिपबिल्डिंग के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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