Kanpur Kidney Racket: 80 लाख में ट्रांसप्लांट के बाद बिगड़ी हालत, महिला लखनऊ रेफर

Kanpur Kidney Racket: 80 लाख में ट्रांसप्लांट के बाद बिगड़ी हालत, महिला लखनऊ रेफर
उत्तर प्रदेश के कानपुर में सामने आए कथित अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। 30 वर्षीय पारुल तोमर ने करीब 80 लाख रुपये खर्च कर किडनी ट्रांसप्लांट कराया था, लेकिन अब इन्फेक्शन के चलते उनकी हालत नाजुक बनी हुई है और वह जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं। हालत बिगड़ने पर उन्हें पहले आईसीयू में भर्ती किया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए लखनऊ रेफर कर दिया गया।
मौजूदा समय में पारुल का इलाज संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में चल रहा है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को इन्फेक्शन से बचाने के लिए बेहद सख्त प्रोटोकॉल और आइसोलेशन की जरूरत होती है, लेकिन शुरुआती इलाज के दौरान इन नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।
बताया जा रहा है कि जिस अस्पताल में पारुल का ट्रांसप्लांट हुआ, वहां बाहरी लोगों की आवाजाही पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं था, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ गया। इसी लापरवाही के चलते उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, उनका हीमोग्लोबिन स्तर गिरकर 6.3 तक पहुंच गया है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। साथ ही उनका यूरिन आउटपुट भी कम हो रहा है, जो किडनी फंक्शन पर असर का संकेत है।
इस मामले में किडनी डोनर आयुष की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि समय पर उचित देखभाल नहीं मिलने पर उनकी हालत भी बिगड़ सकती है। दोनों को पहले आईसीयू में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद पारुल को उन्नत इलाज के लिए लखनऊ शिफ्ट किया गया।
वहीं, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय काला ने स्पष्ट किया है कि उनके संस्थान में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि कॉलेज को अभी तक इस प्रक्रिया के लिए आवश्यक सरकारी अनुमति नहीं मिली है और जरूरी दवाइयों की भी कमी है, ऐसे में यहां इस तरह का इलाज संभव नहीं है।
इस पूरे मामले ने निजी अस्पतालों में नियमों के पालन और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसप्लांट के बाद की देखभाल उतनी ही अहम होती है जितनी सर्जरी, और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
फिलहाल पारुल की हालत गंभीर बनी हुई है और डॉक्टर लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। इस घटना के सामने आने के बाद यह भी सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े स्तर पर ट्रांसप्लांट कैसे हुआ और निगरानी में आखिर कहां चूक हुई।





