दिल्ली

Jan Aushadhi Scheme: सस्ती दवाओं से देशवासियों के ₹40,000 करोड़ बचे, 19,200 से अधिक जन औषधि केंद्र बने राहत का आधार

Jan Aushadhi Scheme: सस्ती दवाओं से देशवासियों के ₹40,000 करोड़ बचे, 19,200 से अधिक जन औषधि केंद्र बने राहत का आधार

 

नई दिल्ली। आम लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना ने पिछले 12 वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है। केंद्र सरकार के अनुसार जन औषधि केंद्रों से जेनेरिक दवाओं की खरीद के कारण देशभर के नागरिकों को अब तक 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है। इस योजना ने विशेष रूप से मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को दवाओं पर होने वाले खर्च से बड़ी राहत प्रदान की है।

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग के तहत वर्ष 2014 में केवल 84 जन औषधि केंद्रों के साथ शुरू हुई यह योजना आज देशभर में 19,200 से अधिक केंद्रों के विशाल नेटवर्क में बदल चुकी है। इन केंद्रों के माध्यम से लोगों को बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वर्तमान में 645 जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं, जबकि 4,042 केंद्रों के साथ उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। वहीं पूर्वोत्तर भारत में भी इस योजना का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2014 में जहां इस क्षेत्र में केवल एक जन औषधि केंद्र था, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 417 तक पहुंच चुकी है।

सरकार का कहना है कि जन औषधि योजना ने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महंगी ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले कम कीमत पर उपलब्ध जेनेरिक दवाओं से लाखों मरीजों को नियमित उपचार जारी रखने में मदद मिली है।

स्वास्थ्य क्षेत्र के साथ-साथ फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस उद्योग में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजनाओं के तहत फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर में 43,800 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है। इसके परिणामस्वरूप देशभर में 1.20 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।

सरकार का मानना है कि सस्ती दवाओं की उपलब्धता, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा, अनुसंधान एवं नवाचार और बायोफार्मा क्षेत्र को मजबूत करने जैसी पहलें भारत को वैश्विक फार्मा हब बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रही हैं। साथ ही ये प्रयास ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जन औषधि योजना ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों की पहुंच तक पहुंचाया है, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास की दिशा में भी एक मजबूत आधार तैयार किया है।

 

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