
Indian Navy CTF 154: भारतीय नौसेना ने पहली बार संभाली सीटीएफ-154 की कमान, वैश्विक समुद्री सुरक्षा में बढ़ी भारत की भूमिका
नई दिल्ली/मनामा, 12 फरवरी। भारतीय नौसेना ने वैश्विक समुद्री सहयोग के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार संयुक्त टास्क फोर्स (सीटीएफ) 154 की कमान संभाल ली है। यह बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण टास्क फोर्स कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (सीएमएफ) के अंतर्गत कार्य करती है, जिसमें भारत सहित कुल 47 देश शामिल हैं। इस घटनाक्रम को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा ढांचे में भारत की बढ़ती भूमिका के रूप में देखा जा रहा है।
कमांड परिवर्तन समारोह 11 फरवरी को बहरीन की राजधानी मनामा स्थित सीएमएफ मुख्यालय में आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता कमांडर सीएमएफ एवं यूएस फिफ्थ फ्लीट के वाइस एडमिरल कर्ट ए. रेंशॉ ने की। इस अवसर पर भारतीय नौसेना के उप नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल तरुण सोबती सहित विभिन्न सदस्य देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कमोडोर मिलिंद एम. मोकाशी, शौर्य चक्र, ने इतालवी नौसेना के अधिकारी से सीटीएफ-154 की कमान औपचारिक रूप से ग्रहण की।
सीटीएफ-154 की स्थापना मई 2023 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करना और प्रशिक्षण के माध्यम से सहयोग बढ़ाना है। यह टास्क फोर्स पांच प्रमुख स्तंभों पर आधारित प्रशिक्षण प्रदान करती है—मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (समुद्री क्षेत्र जागरूकता), लॉ ऑफ द सी (समुद्री कानून), मैरीटाइम इंटरडिक्शन ऑपरेशन (समुद्री अवरोधन अभियान), मैरीटाइम रेस्क्यू एंड असिस्टेंस (समुद्री बचाव एवं सहायता) और लीडरशिप डेवलपमेंट (नेतृत्व विकास)।
भारतीय नौसेना द्वारा इस टास्क फोर्स की कमान संभालना न केवल उसकी पेशेवर दक्षता और विश्वसनीयता का प्रमाण है, बल्कि यह हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे समुद्री स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे समुद्री डकैती, तस्करी, अवैध गतिविधियों और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों से निपटने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत होगा।
सीएमएफ विश्व की सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय समुद्री साझेदारी में से एक है, जिसका मुख्यालय बहरीन में स्थित है। इसका उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा, स्थिरता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देना है। भारतीय नौसेना की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व भूमिका भारत की वैश्विक रणनीतिक उपस्थिति को और सशक्त करती है।





