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India at Bogota Book Fair 2026: 3 लाख लोगों ने महसूस की भारतीय सभ्यता की भव्यता, दुनिया ने देखा भारत का सांस्कृतिक वैभव

India at Bogota Book Fair 2026: 3 लाख लोगों ने महसूस की भारतीय सभ्यता की भव्यता, दुनिया ने देखा भारत का सांस्कृतिक वैभव

बोगोटा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला 2026 में भारत ने ‘विशिष्ट अतिथि देश’ के रूप में अपनी ऐतिहासिक भागीदारी से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस आयोजन में भारतीय संस्कृति, साहित्य और परंपराओं की ऐसी झलक देखने को मिली कि करीब 3 लाख से अधिक आगंतुकों ने इंडिया पैविलियन में भारतीय सभ्यता की भव्यता को करीब से महसूस किया। यह पैविलियन मेले का सबसे बड़ा आकर्षण बनकर उभरा और वैश्विक मंच पर भारत की सॉफ्ट पावर को और मजबूत किया।

लगभग 3000 वर्ग मीटर में फैला इंडिया पैविलियन इस मेले का केंद्र बिंदु रहा, जहां भारत की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को बेहद खूबसूरत तरीके से प्रस्तुत किया गया। आगंतुकों ने यहां भारत की साहित्यिक विरासत, कला, परंपराओं और आधुनिक सोच का अनूठा संगम देखा, जिसे “एक साथ कई भारत” के अनुभव के रूप में सराहा गया।

इस भव्य आयोजन में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की अहम भूमिका रही, जिसके तहत 105 से अधिक साहित्यिक सत्र, 27 फिल्म प्रदर्शन और 14 सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों ने न सिर्फ भारतीय लेखकों और विचारकों को अंतरराष्ट्रीय मंच दिया, बल्कि भारत की साहित्यिक शक्ति को भी दुनिया के सामने मजबूती से रखा।

इंडिया पैविलियन की डिजाइन भी आकर्षण का बड़ा कारण बनी, जिसे केरल के नालुकेट्टू, आमेर फोर्ट और हम्पी बाजार से प्रेरित किया गया था। इस अनोखे डिजाइन ने विदेशी आगंतुकों को भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत अनुभव कराया। यहां आने वाले लोगों ने भारतीय वास्तुकला और सांस्कृतिक विविधता की खुलकर सराहना की।

इस आयोजन की एक और बड़ी उपलब्धि यह रही कि भारत की 75 प्रमुख पुस्तकों का स्पेनिश भाषा में अनुवाद किया गया, जिससे लैटिन अमेरिका के पाठकों को भारतीय साहित्य को समझने और पढ़ने का नया अवसर मिला। इसे भारत की साहित्यिक कूटनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

कोलंबिया के पूर्व राष्ट्रपति अर्नेस्टो सैम्पर ने इंडिया पैविलियन को “भारतीय सभ्यता का अद्भुत प्रस्तुतीकरण” बताया और कहा कि यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है। वहीं आयोजकों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह भागीदारी भारत और लैटिन अमेरिका के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत है।

भारत की यह उपस्थिति सिर्फ एक सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती सॉफ्ट पावर, साहित्यिक प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कूटनीति का मजबूत संकेत मानी जा रही है।

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