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Noida Health: निजी अस्पतालों में हर महीने 10-12 किशोरियां लगवा रहीं एचपीवी वैक्सीन, सर्वाइकल कैंसर से बचाव की बढ़ी जागरूकता

Noida Health: निजी अस्पतालों में हर महीने 10-12 किशोरियां लगवा रहीं एचपीवी वैक्सीन, सर्वाइकल कैंसर से बचाव की बढ़ी जागरूकता

उत्तर प्रदेश के Noida में सर्वाइकल कैंसर से बचाव को लेकर जागरूकता धीरे-धीरे बढ़ रही है। भारत सरकार द्वारा ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीन का निशुल्क टीकाकरण अभियान शुरू किए जाने से पहले ही शहर के निजी अस्पतालों में किशोरियों को यह वैक्सीन दी जा रही थी। अब भी हर महीने औसतन 10 से 12 किशोरियां एचपीवी वैक्सीन लगवाने निजी अस्पताल पहुंच रही हैं। इनकी उम्र आमतौर पर 9 से 14 वर्ष के बीच होती है।

स्वास्थ्य विभाग के एचपीवी टीकाकरण अभियान के तहत 14 वर्ष तक की किशोरियों को वैक्सीन लगाने की योजना है। वहीं निजी अस्पतालों में अभिभावक स्वयं जागरूक होकर अपनी बेटियों को वैक्सीन लगवा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में टीकाकरण सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम कर देता है।

सेक्टर-50 स्थित Medanta Hospital की गाइनेकोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. प्रिया बंसल के अनुसार, ओपीडी में आने वाली करीब 60 प्रतिशत महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए पहुंचती हैं। इन महिलाओं की उम्र 21 से 65 वर्ष के बीच होती है। हर महीने लगभग 2 से 3 महिलाएं सर्वाइकल कैंसर पॉजिटिव भी पाई जाती हैं। उन्होंने बताया कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए 9 से 14 वर्ष की किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन लगवाना सबसे उपयुक्त है। इस आयु वर्ग में दो डोज दी जाती हैं—पहली डोज के 6 से 12 महीने बाद दूसरी डोज लगती है। 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र की लड़कियों और महिलाओं को तीन डोज (0, 2 और 6 महीने) में वैक्सीन दी जाती है।

निजी अस्पतालों के आंकड़ों के अनुसार, सेक्टर-110 स्थित Yatharth Hospital में जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच 60 किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन लगाई गई। वहीं Medanta Hospital में हर महीने लगभग 10 किशोरियां टीकाकरण करा रही हैं। सेक्टर-11 स्थित Metro Hospital में बीते छह महीनों में 13 किशोरियों ने वैक्सीन लगवाई है।

हालांकि, एसीएमओ व जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. आरके सिरोहा का कहना है कि निजी अस्पतालों द्वारा एचपीवी वैक्सीनेशन का डाटा स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध नहीं कराया जाता। उन्होंने बताया कि यू-विन पोर्टल का उपयोग मुख्य रूप से बच्चों के नियमित टीकाकरण के लिए किया जा रहा है और निजी अस्पताल इस पोर्टल पर एचपीवी वैक्सीन का डाटा अपलोड नहीं करते। इससे स्वास्थ्य विभाग को जिले में कुल टीकाकरण की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में कठिनाई होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है, लेकिन समय पर स्क्रीनिंग और एचपीवी वैक्सीन के जरिए इससे बचाव संभव है। बढ़ती जागरूकता के चलते अब अधिक अभिभावक अपनी बेटियों के स्वास्थ्य को लेकर सजग हो रहे हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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