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Hathras: यमुना एक्सप्रेसवे के पास बसेगा नया हाथरस, मास्टर प्लान 2041 की तैयारी तेज

Hathras: यमुना एक्सप्रेसवे के पास बसेगा नया हाथरस, मास्टर प्लान 2041 की तैयारी तेज

नया हाथरस अर्बन सेंटर यमुना एक्सप्रेसवे के नजदीक बसाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शहर के मास्टर प्लान 2041 को लेकर तकनीकी बिड प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जिसमें तीन कंपनियां क्वालिफाई हुई हैं। अब अगला चरण वित्तीय बिड का होगा, जिसके बाद चयनित कंपनी नए शहर का मास्टर प्लान तैयार करेगी। यमुना एक्सप्रेसवे से सटी जमीन पर आधुनिक शहरी विकास को प्राथमिकता देते हुए चरणबद्ध तरीके से शहर को विकसित करने की रणनीति तैयार की जा रही है।

प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फेज-2 के अंतर्गत हाथरस के मास्टर प्लान को तैयार करने के लिए तीन कंपनियों ने आवेदन किया था। इनमें आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट लिमिटेड, गरुणा यूएसबी सॉफ्ट सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड और एलईए एसोसिएट साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन तीनों कंपनियों ने सीईओ आरके सिंह की अध्यक्षता में गठित कमेटी के सामने अपना प्रस्तुतीकरण दिया था, जिसके बाद सभी को तकनीकी रूप से योग्य घोषित कर दिया गया। अब जल्द ही वित्तीय बिड आमंत्रित की जाएगी और उसके आधार पर किसी एक कंपनी का चयन किया जाएगा।

चयनित कंपनी पहले चरण में करीब 4000 हेक्टेयर क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार करेगी। यह क्षेत्र पूरी तरह यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित किया जाएगा। प्राधिकरण का मानना है कि एक्सप्रेसवे के नजदीक औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने से निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके बाद आगे के चरणों में शहर के अन्य हिस्सों के विकास की रणनीति बनाई जाएगी।

ऐतिहासिक रूप से हाथरस ब्रिटिश काल में एक बड़ा औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र रहा है। उस समय यह क्षेत्र उद्योग और कारोबार के लिए जाना जाता था, लेकिन समय के साथ बुनियादी ढांचे और आधुनिक सुविधाओं के अभाव में इसका महत्व कम होता चला गया। वर्तमान में हाथरस जिले में एमएसएमई और कुटीर उद्योगों का दबदबा है। एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार जिले में लगभग 10,293 उद्योग पंजीकृत हैं, जिनमें अधिकांश उद्योग क्लस्टर के रूप में विकसित हैं और कम निवेश में अधिक रोजगार देने वाले हैं।

प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में हाथरस जिले के कुल 358 गांव शामिल हैं। हाथरस की एक बड़ी खासियत यह है कि यहां अलीगढ़ और आगरा की तुलना में सड़क संपर्क बेहतर है। नया शहर एनएच-93 और यमुना एक्सप्रेसवे के माध्यम से एसएच-33 से जुड़ा रहेगा। इसके अलावा हाथरस जंक्शन पर दो प्रमुख रेल लाइनों का मिलन होता है, जिससे रेल कनेक्टिविटी भी मजबूत है। हालांकि, जिले में कई चुनौतियां भी सामने आई हैं, जिनमें आंतरिक सड़कों की कमी, पर्याप्त बिजली और जल आपूर्ति का अभाव, सीवरेज व्यवस्था की कमजोरी, स्वास्थ्य सेवाओं और मनोरंजन सुविधाओं की कमी प्रमुख हैं।

हाथरस जिले में वर्तमान में कई उद्योग क्लस्टर सक्रिय हैं, जिनमें कांच की चूड़ियां निर्माण की लगभग 3300 इकाइयां, घुंघरू निर्माण की 3124 इकाइयां, होजरी और कपड़ा उद्योग की 1600 इकाइयां, हस्तशिल्प की 850 इकाइयां, कोल्ड स्टोरेज की 140 इकाइयां, धातु शिल्प की 85 इकाइयां, रंग और डाई की 40 इकाइयां, दाल मिल की 35 इकाइयां, हींग निर्माण की 32 इकाइयां, आयुर्वेदिक दवा की 30 इकाइयां, अचार निर्माण की 16 इकाइयां और तीन बॉटलिंग प्लांट व डेयरी शामिल हैं। प्राधिकरण का मानना है कि नए अर्बन सेंटर के विकसित होने से इन उद्योगों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के एसीईओ शैलेंद्र भाटिया ने कहा कि वित्तीय बिड के बाद एक संस्था का चयन कर मास्टर प्लान तैयार कराया जाएगा। शुरुआत में यमुना एक्सप्रेसवे के नजदीक शहर का विकास किया जाएगा, जिससे बेहतर कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे के साथ नया हाथरस एक आधुनिक शहरी केंद्र के रूप में उभर सके।

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