Greater Noida: ग्रेटर नोएडा में कचरा निस्तारण के लिए लगेंगे चार आधुनिक संयंत्र, बायो-सीएनजी से होगी कमाई

Greater Noida: ग्रेटर नोएडा में कचरा निस्तारण के लिए लगेंगे चार आधुनिक संयंत्र, बायो-सीएनजी से होगी कमाई
नोएडा: ग्रेटर नोएडा में जैविक, उद्यानिक, इलेक्ट्रॉनिक समेत सभी प्रकार के कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए चार अत्याधुनिक संयंत्र लगाए जाएंगे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं और विशेषज्ञ कंपनियों से सुझाव व प्रस्ताव प्राप्त करने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी किया है। कंपनियों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले तकनीकी और व्यावसायिक मॉडल के अध्ययन के बाद आगे निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
योजना के तहत जैविक (बायो-डिग्रेडेबल) कचरे को आधुनिक तकनीक से प्रोसेस कर उससे बायो-सीएनजी गैस तैयार की जाएगी। इसके लिए अस्तौली क्षेत्र में 300 टन प्रतिदिन (टीपीडी) क्षमता का बड़ा संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना को बीओटी (बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर) या पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर विकसित किया जा सकता है, जिसमें होने वाली आय में प्राधिकरण की भी हिस्सेदारी होगी।
जैविक कचरे में फल-सब्जियों के छिलके, खाद्य अपशिष्ट और अन्य जैविक अवशेष शामिल होंगे। अस्तौली में विकसित किए जा रहे कूड़ा निस्तारण केंद्र परिसर में एनटीपीसी और रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों को भी भूखंड आवंटित किए गए हैं। एनटीपीसी की ओर से पहले से ही संयंत्र लगाने का कार्य प्रगति पर है।
इसके अलावा पौवारी स्थित गोशाला में 50 टीपीडी क्षमता का बायो गैस संयंत्र लगाया जाएगा। इस संयंत्र में गाय के गोबर और अन्य जैविक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। इससे उत्पन्न बायो गैस को बेचकर होने वाली आय को गोशालाओं के रखरखाव और संचालन में खर्च किया जाएगा।
प्राधिकरण ने उद्यानिक कचरे के निस्तारण को लेकर भी ठोस योजना बनाई है। सूखे पत्ते, घास की कटाई और पेड़ों की छंटाई से निकलने वाले कचरे के लिए 50 टीपीडी क्षमता का अलग संयंत्र लगाया जाएगा। संयंत्र संचालित करने वाली कंपनी को मियावाकी वन, सेंट्रल वर्ज और अन्य चिन्हित क्षेत्रों से उद्यानिक कचरा एकत्र कर प्रोसेस करना होगा।
साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) के सुरक्षित और वैज्ञानिक निस्तारण के लिए भी अलग संयंत्र स्थापित किया जाएगा। घरों, कार्यालयों और संस्थानों से निकलने वाले ई-कचरे को एकत्र कर निर्धारित संयंत्र तक पहुंचाया जाएगा, जहां पर्यावरण मानकों के अनुरूप इसका निस्तारण किया जाएगा।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का मानना है कि इन परियोजनाओं से न केवल स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि कचरे से ऊर्जा उत्पादन कर राजस्व भी अर्जित किया जा सकेगा।
प्राधिकरण की एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस ने बताया कि सभी तरह के कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की योजना पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। ईओआई जारी कर कंपनियों से सुझाव मांगे गए हैं और प्राप्त मॉडलों के अध्ययन के बाद जल्द ही निविदा जारी की जाएगी।





