Greater Noida Dog Feeding Point: आवारा कुत्तों के लिए बनेंगे 1200 फीडिंग प्वाइंट, 1.9 करोड़ रुपये से तैयार होंगे चबूतरे
Greater Noida Dog Feeding Point: आवारा कुत्तों के लिए बनेंगे 1200 फीडिंग प्वाइंट, 1.9 करोड़ रुपये से तैयार होंगे चबूतरे
नोएडा। ग्रेटर नोएडा में लावारिस कुत्तों को खाना खिलाने को लेकर होने वाले विवादों को कम करने के लिए प्राधिकरण ने बड़ा कदम उठाया है। ग्रेटर नोएडा ईस्ट और वेस्ट क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के लिए 1200 फीडिंग प्वाइंट बनाए जाएंगे। इन स्थानों पर विशेष चबूतरे तैयार किए जाएंगे, जहां लोग निर्धारित जगह पर कुत्तों को खाना खिला सकेंगे।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने इस योजना के लिए निविदा जारी कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, इन चबूतरों के निर्माण पर करीब 1.9 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उम्मीद है कि निर्माण कार्य अगले एक से दो महीने के भीतर शुरू हो जाएगा।
प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि चबूतरे बनाने से पहले पशु प्रेमियों, आरडब्ल्यूए, एओए और स्थानीय निवासियों के साथ बैठक की जाएगी। सभी पक्षों की सहमति के बाद ही स्थानों पर काम शुरू किया जाएगा। यदि किसी स्थान को लेकर सहमति नहीं बनती है तो सात सदस्यीय समिति मामले पर निर्णय लेगी।
फिलहाल ग्रेटर नोएडा ईस्ट और वेस्ट में 1200 स्थानों की पहचान की गई है, जहां चरणबद्ध तरीके से फीडिंग प्वाइंट बनाए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर इनकी संख्या को बढ़ाया भी जा सकता है। प्रत्येक फीडिंग प्वाइंट पर एक सूचना बोर्ड भी लगाया जाएगा, जिससे लोगों को इसकी जानकारी मिल सके।
प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक राजेश कुमार गौतम ने बताया कि स्थानों के चयन में आरडब्ल्यूए, एओए और पशु प्रेमियों का सहयोग लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले चिन्हित किए गए स्थानों को लेकर संबंधित संगठनों के साथ बैठकें शुरू कर दी गई हैं। इस पूरी प्रक्रिया को सुचारु रूप से लागू करने के लिए सात सदस्यीय समिति भी गठित की गई है।
दरअसल, ग्रेटर नोएडा की कई ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने के स्थान को लेकर अक्सर विवाद सामने आते रहे हैं। कई मामलों में स्थिति इतनी बढ़ गई कि पुलिस तक को हस्तक्षेप करना पड़ा। एक पक्ष जहां पशु अधिकारों का हवाला देता है, वहीं दूसरा पक्ष सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर चिंता जताता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर लावारिस कुत्तों को खाना खिलाने की अनुमति नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण ने निर्धारित फीडिंग प्वाइंट बनाने की योजना तैयार की है, ताकि पशु प्रेमियों को सुविधा मिले और स्थानीय निवासियों के बीच होने वाले विवादों को भी कम किया जा सके।





