Greater Noida: ग्रेटर नोएडा में बदलने जा रहा कॉमर्शियल भू-उपयोग, मॉल की जगह बनेंगे अस्पताल और स्कूल
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने शहर के नियोजित विकास में बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। अब आवासीय और औद्योगिक सेक्टरों में मौजूद कॉमर्शियल भूखंडों का उपयोग बदलकर उन पर स्कूल, कॉलेज और अस्पताल जैसे संस्थान विकसित किए जाएंगे। इस संबंध में प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने नियोजन विभाग को ऐसे भूखंडों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं, जिनकी कॉमर्शियल मांग लगातार कम बनी हुई है।
प्राधिकरण के अनुसार औद्योगिक सेक्टरों में कई ऐसे कॉमर्शियल भूखंड हैं, जिन्हें शॉपिंग मॉल और हाई स्ट्रीट मार्केट के लिए विकसित किया गया था, लेकिन इनकी वास्तविक मांग अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में इन भूखंडों को अब अधिक उपयोगी सामाजिक ढांचे—जैसे अस्पताल या औद्योगिक उपयोग—में बदलने की योजना बनाई जा रही है।
इसी तरह आवासीय सेक्टरों में भी कई स्थानों पर कॉमर्शियल भूखंड अत्यधिक संख्या में आवंटित कर दिए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि हर सेक्टर में सीमित संख्या में ही कॉमर्शियल स्पेस की जरूरत होती है, जबकि स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। इसलिए इन भूखंडों को संस्थागत उपयोग में बदला जा सकता है।
हालांकि, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि कॉमर्शियल भूखंडों का भू-उपयोग बदलना आसान नहीं होगा। इसके लिए राज्य सरकार और कैबिनेट की मंजूरी आवश्यक होगी, क्योंकि कॉमर्शियल भूमि की कीमत संस्थागत या औद्योगिक भूमि से कई गुना अधिक होती है। ऐसे में राजस्व प्रभाव को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इसके साथ ही एक बड़ी समस्या खाली पड़े कॉमर्शियल भूखंडों को लेकर भी सामने आ रही है। कई जगह जमीन खाली होने के कारण वहां कचरा फेंकने की घटनाएं बढ़ गई हैं, जिससे न केवल गंदगी फैल रही है बल्कि शहर की छवि भी प्रभावित हो रही है। प्राधिकरण के सामने इन भूखंडों की देखरेख और सुरक्षा भी एक बड़ी चुनौती बन गई है।
प्राधिकरण का मानना है कि इस बदलाव से शहर में स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का विस्तार होगा और अव्यवस्थित कॉमर्शियल विकास को नियंत्रित किया जा सकेगा।



