Farmers Compensation: नोएडा में किसानों के मुआवजे पर अहम बैठक, जेवर विधायक बोले- बाजार भाव के हिसाब से तय हो जमीन की कीमत
नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में शुक्रवार को किसानों की जमीन के उचित मुआवजे और लंबे समय से लंबित समस्याओं को लेकर अहम बैठक हुई। जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने प्राधिकरण के सीईओ और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में सबसे अधिक जोर जमीन की खरीद और मुआवजा दर को मौजूदा बाजार परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित करने पर दिया गया।
बैठक के दौरान विधायक धीरेन्द्र सिंह ने कहा कि जेवर और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से औद्योगिक और बुनियादी ढांचे का विकास हुआ है। बड़े निवेश और परियोजनाओं के कारण जमीन की वास्तविक बाजार कीमत में भी बड़ा बदलाव आया है। ऐसे में किसानों से जमीन खरीदने या अधिग्रहण करने के दौरान पुराने मूल्यांकन के आधार पर मुआवजा तय करना उचित नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स से जुड़ी परियोजनाओं और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के कारण क्षेत्र में जमीन की मांग और बाजार मूल्य दोनों बढ़े हैं। इसके साथ ही औद्योगिक निवेश भी लगातार बढ़ रहा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को मिलने वाली जमीन की कीमत और मुआवजा दर की समयबद्ध समीक्षा की जानी चाहिए।
किसानों के मुआवजे का मुद्दा इससे पहले 17 अगस्त को आयोजित कोर कमेटी की बैठक में भी प्रमुखता से उठाया गया था। उस बैठक में जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह के साथ एमएलसी नरेंद्र भाटी, श्रीचंद शर्मा और दादरी विधायक तेजपाल नागर ने प्रभारी मंत्री बृजेश कुमार सिंह के सामने किसानों की मुआवजा दर बढ़ाने की मांग रखी थी।
इसके बाद जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर क्षेत्र के किसानों की समस्याओं और मुआवजे से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की थी। अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास दीपक कुमार के सामने भी क्षेत्र में जमीन के बढ़ते बाजार मूल्य और प्राधिकरण की बढ़ी हुई आवंटन दरों का विषय रखा गया था।
शुक्रवार को हुई बैठक में विधायक ने सुझाव दिया कि किसानों की जमीन का मूल्य निर्धारित करते समय केवल सर्किल रेट को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। क्षेत्र में हाल के दिनों में हुई जमीन की रजिस्ट्रियों, वास्तविक बाजार भाव और प्राधिकरण की मौजूदा आवंटन दरों को भी मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब प्राधिकरण की ओर से विभिन्न उपयोगों के लिए जमीन की आवंटन दरों में बदलाव होता है और बाजार में जमीन की कीमत लगातार बढ़ती है, तो किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे की दर की भी समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इससे जमीन देने वाले किसानों को मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप उचित कीमत मिल सकेगी।
विधायक धीरेन्द्र सिंह ने नए भूमि अधिग्रहण कानून में निर्धारित उचित प्रतिकर की भावना के अनुरूप किसानों के लिए पारदर्शी व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि विकास परियोजनाओं के लिए अपनी जमीन देने वाले किसानों के हितों का संरक्षण भी विकास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
बैठक में मुआवजा दर के अलावा किसानों की अन्य लंबित समस्याओं पर भी चर्चा की गई। विधायक ने प्राधिकरण के अधिकारियों से किसानों से संबंधित लंबित मामलों को समयबद्ध तरीके से निस्तारित करने और ऐसी व्यवस्था विकसित करने को कहा, जिससे किसानों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार प्राधिकरण के चक्कर न लगाने पड़ें।


