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डॉक्टर हड़ताल : स्वास्थ्य कर्मियों के लिए केंद्रीय कानून की मांग पर अड़े डॉक्टर

- फोर्डा ने स्वास्थ्य मंत्री से आश्वासन मिलने के बाद हड़ताल की खत्म, फाइमा ने किया हड़ताल का आह्वान

नई दिल्ली, 14 अगस्त : कोलकाता की महिला डॉक्टर के रेप और हत्या के विरोध में तीन दिन से हड़ताल-रत देशभर के डॉक्टरों ने बुधवार को भी ओपीडी, वार्ड और लैब सेवाओं से दूरी बनाए रखी। डॉक्टरों ने स्वास्थ्य कर्मियों के लिए केंद्रीय कानून के बाबत लिखित आश्वासन मिले बगैर हड़ताल ख़त्म करने से इनकार कर दिया है।

हालांकि, मंगलवार शाम हड़ताल के आयोजक फोर्डा के पदाधिकारियों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात के बाद हड़ताल समाप्ति की घोषणा कर दी थी। मगर डॉक्टरों के दूसरे गुट फाइमा ने देर रात हड़ताल जारी रखने का फैसला किया जिसके चलते बुधवार सुबह दिल्ली व देश के अन्य अस्पतालों में हड़ताल फिर से शुरू हो गई। लेकिन इन सब कारणों से गरीब और जरूरतमंद लोग सरकारी अस्पतालों में तीसरे दिन भी इलाज पाने से वंचित हो गए। इस दौरान सर्जरी व रेडिओलॉजिकल जांच वाले मरीज और उनके तीमारदार काफी परेशान रहे। उधर, एम्स दिल्ली, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज,आरएमएल और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने हड़ताल जारी रखते हुए विरोध प्रदर्शन किया और पैदल मार्च भी किया। वहीं, गुरु तेगबहादुर अस्पताल, हेडगेवार आरोग्य संस्थान, दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान के रेजिडेंट डॉक्टरों ने न सिर्फ काम रोको हड़ताल जारी रखी बल्कि संयुक्त रूप से प्रदर्शन भी किया।

इस बीच मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों की रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया जिसकी अध्यक्ष डॉ अपर्णा सेतिया को बनाया गया। उन्होंने कहा कि हमारी हड़ताल की दो प्रमुख मांगे हैं। पहली पश्चिम बंगाल सरकार से आरजी कर अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों की सभी मांगों को मनवाना और केंद्र सरकार से स्वास्थ्य कर्मियों के लिए केंद्रीय कानून के बाबत लिखित आश्वासन। जब तक ये दो मांगे पूरी नहीं होंगी तबतक हम हड़ताल पर रहेंगे। एलएचएमसी के अध्यक्ष डॉ सारदा प्रसाद साहू, आरएमएल आरडीए के महासचिव डॉ आयुष राज भी डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर केंद्रीय कानून से कम पर समझौता करने से इनकार किया। वहीं, सफदरजंग अस्पताल के डॉ रजत गंगवार ने पीड़िता के साथ एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा दुष्कर्म करने की बात कही। उन्होंने कहा, इस मामले में चार इंटर्न की भूमिका संदिग्ध है उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। उनसे पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है।

आरएमएल के डॉ आदिल अमीन ने कहा, आरजी अस्पताल के वारदात स्थल से छेड़छाड़ और सबूत मिटाने की बात सामने आ रही है। इस संबंध में स्थानीय पुलिस के लापरवाही भरे रवैये को लेकर हम हैरान हैं। पीड़िता को इंसाफ मिलने तक हड़ताल जारी रखेंगे। एम्स के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ राजेश खडगावत ने कहा ,कोलकाता में एक डॉक्टर से जुड़ी हाल ही की दुखद घटना के मद्देनजर,फेम्स (एम्स का संकाय संघ) एम्स के रेजिडेंट और मेडिकल छात्रों के साथ एकजुटता में खड़ा है जो न्याय की मांग के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। फेम्स के सदस्यों ने रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ बुधवार शाम जवाहरलाल नेहरू सभागार से लेकर मुख्य सड़क तक विरोध मार्च भी निकाला। फैकल्टी एसोसिएशन ऑफ वीएमएमसी एंड सफदरजंग अस्पताल के अध्यक्ष डॉ हिमानी आहलूवालिया ने भी हड़ताल का समर्थन किया। उधर, आईएमए की टीम बुधवार को पश्चिम बंगाल पहुंची और ड्यूटी के दौरान रेप और हत्या की शिकार पीड़िता के परिजनों से उत्तर 24 परगना स्थित सोदेपुर, पनीहती क्षेत्र में मुलाकात की। टीम ने पीड़िता के परिजनों को इंसाफ दिलाने के बाबत हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया।

क्या है हड़ताली डॉक्टरों की मुख्य मांग
1. सीबीआई द्वारा जांच में तेजी लाई जाए।
2. संदिग्ध अपराध स्थल के ध्वस्तीकरण/पुनर्निर्माण से जुड़े सभी लोगों को तत्काल जांच के दायरे में लाया जाए।
3. उच्च अधिकारियों (प्रधानाचार्य, एमएसवीपी, छात्र मामलों के डीन, श्वसन चिकित्सा विभागाध्यक्ष और उस दिन ड्यूटी पर मौजूद सहायक अधीक्षक) से लिखित माफी और निलंबन का लिखित आदेश दिया जाए और उन्हें उनकी सेवा की शेष अवधि के लिए किसी भी संस्थान में कोई प्रशासनिक या आधिकारिक पद नहीं दिया जाए।
4. किसी की जान जाने पर कोई मुआवजा नहीं दिया जा सकता। हालाँकि, इकलौती संतान होने के नाते, उसके माता-पिता को सरकार द्वारा आजीवन सहायता के साथ वित्तीय मुआवज़ा मिले, जिसकी घोषणा तुरंत की जाए।
5. सभी मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में तत्काल प्रभाव से पर्याप्त सुरक्षा उपाय (सीसीटीवी, पुरुष और महिला सुरक्षा गार्ड, पुलिस पिकेटिंग और गश्त और उचित ऑन कॉल रूम सहित) सुनिश्चित करें।

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