Cyber Crime: बीमा कंपनी का प्रतिनिधि बनकर ठगी करने वाला इंटरस्टेट साइबर गैंग गिरफ्तार, चार राज्यों में करोड़ों का फ्रॉड

Cyber Crime: बीमा कंपनी का प्रतिनिधि बनकर ठगी करने वाला इंटरस्टेट साइबर गैंग गिरफ्तार, चार राज्यों में करोड़ों का फ्रॉड

साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बीमा पॉलिसी बेचने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक इंटरस्टेट साइबर फ्रॉड गैंग का खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गैंग के पांच अन्य सदस्य अभी फरार हैं। यह गैंग खुद को बीमा कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर लोगों को कॉल करता था और अधिक लाभ का लालच देकर पॉलिसी के नाम पर लाखों रुपये हड़प लेता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 12 मोबाइल फोन, एक चेक, 12 एटीएम कार्ड, 8 सिम कार्ड और एक हुंडई वेन्यू कार बरामद की है।

एडीसीपी साइबर पियूष सिंह ने बताया कि साइबर थाना पुलिस ने ऋषभ कुमार श्रीवास्तव, विनय गुप्ता, आशीष पवार, हिमांशु त्यागी और यशपाल वर्मा को गिरफ्तार किया है। वहीं गैंग के अन्य सदस्य सरवन तिवारी, विक्की धवन, हिमांशु चौधरी, वीर और बन्टी उर्फ डीडी फरार हैं, जिनकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गैंग के मुख्य सदस्य सरवन तिवारी, विक्की धवन और हिमांशु चौधरी पहले लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी से जुड़े कॉल सेंटर चलाते थे। इनके पास बीमा कंपनियों के पुराने ग्राहकों का डाटा मौजूद था। इसी डाटा का इस्तेमाल कर ये लोग ग्राहकों को फोन करते और खुद को बीमा कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि बताकर पॉलिसी भुगतान या नई पॉलिसी में ज्यादा मुनाफे का झांसा देते थे।

आरोपी ग्राहकों को अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कराने के बाद उन्हें पॉलिसी भुगतान की फर्जी रसीद भेज देते थे, जिससे पीड़ितों को भरोसा हो जाए कि उनका पैसा सुरक्षित है। गैंग के सदस्य ऋषभ कुमार श्रीवास्तव, आशीष पवार, विनय गुप्ता और हिमांशु त्यागी बैंक खातों की व्यवस्था करते थे। इन खातों में आने वाले फ्रॉड के पैसों को चेक और एटीएम कार्ड के जरिए निकालकर आपस में बांट लिया जाता था।

जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल से कई बड़े मामलों का खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक महाराष्ट्र निवासी नवीन अग्रवाल से 16 हजार 680 रुपये, महाराष्ट्र के ही प्रमोद कुमार चौधरी से 78 हजार रुपये और छत्तीसगढ़ निवासी दिलेश्वर प्रसाद पटेल से करीब 95 लाख रुपये की ठगी की गई थी। इसके अलावा बरामद खातों और मोबाइल नंबरों के आधार पर अन्य साइबर अपराधों की भी जांच की जा रही है।

एडीसीपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी ऋषभ कुमार श्रीवास्तव और विनय गुप्ता पहले भी वर्ष 2022 में सूरत, गुजरात के साइबर क्राइम थाने से इसी तरह के मामलों में जेल जा चुके हैं। इसके बावजूद उन्होंने दोबारा संगठित होकर ठगी का नेटवर्क खड़ा किया और चार राज्यों में लोगों को अपना शिकार बनाया।

पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस गिरोह से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ साइबर ठगी से जुड़ी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

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