AIIA: आयुर्वेद में एआई का संगम: AIIA और CAYEIT ने किया ऐतिहासिक समझौता

AIIA: आयुर्वेद में एआई का संगम: AIIA और CAYEIT ने किया ऐतिहासिक समझौता
नई दिल्ली, 27 जनवरी: आयुष मंत्रालय के प्रमुख संस्थान अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), दिल्ली और सेंटर फॉर आयुर्वेद एजुकेशन, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी (CAYEIT) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह साझेदारी आयुर्वेदिक चिकित्सा, डिजिटल स्वास्थ्य, अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
समझौता समारोह का आयोजन बृहस्पति देव त्रिगुणा ऑडिटोरियम में किया गया, जिसमें आयुर्वेद और प्रौद्योगिकी जगत के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का स्वागत भाषण कौमारभृत्य विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. महापात्र अरुण कुमार ने किया। इसके पश्चात CAYEIT के मुख्य शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी अधिकारी अविरल अपूर्व ने समझौते के उद्देश्यों, नवाचारों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
AIIA के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने अपने संबोधन में कहा कि CAYEIT की तकनीकी दक्षता और AIIA की चिकित्सीय विशेषज्ञता का यह समन्वय आयुर्वेद को वैश्विक स्वास्थ्य परिदृश्य में नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। उन्होंने इसे आयुर्वेद और आधुनिक तकनीक के संगम का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि इससे आयुर्वेदिक ज्ञान और उपचार पद्धतियों में वैज्ञानिक साक्ष्यों का समावेश होगा और उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकेगा।
पूर्व निदेशक प्रो. अभिमन्यु कुमार ने ‘आयुर्वेद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुप्रयोग’ विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि नेटवर्क फार्माकोलॉजी, बिग डेटा और मशीन लर्निंग जैसे आधुनिक उपकरणों के माध्यम से आयुर्वेदिक सिद्धांतों और औषधियों के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस वैज्ञानिक साक्ष्य विकसित किए जा सकते हैं। इसके साथ ही AI-आधारित मॉडल रोग निदान, औषधि अनुसंधान और व्यक्तिगत स्वास्थ्य योजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
इस अवसर पर AIIA के डीन, अनुसंधान प्रो. राजगोपाल एस., और डीयू की डीन (आयुर्वेद) प्रो. मंजुषा राजगोपाल भी मौजूद रहे। दोनों अधिकारियों ने नई साझेदारी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह समझौता आयुर्वेद शिक्षा, नवाचार और वैश्विक स्वास्थ्य सुधार में एक मील का पत्थर साबित होगा।
समझौता ज्ञापन के तहत दोनों संस्थान डिजिटल स्वास्थ्य परियोजनाओं, अनुसंधान कार्यों, प्रशिक्षण और शिक्षा कार्यक्रमों में सहयोग करेंगे। इससे आयुर्वेद को न केवल पारंपरिक रूप में बल्कि तकनीकी रूप से सशक्त बनाकर वैश्विक स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप विकसित किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस साझेदारी के माध्यम से आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का संयोजन नई खोजों और उपचार पद्धतियों को जन्म देगा।
इस ऐतिहासिक समझौते से यह स्पष्ट हुआ कि आयुर्वेद में तकनीकी नवाचार और डिजिटल स्वास्थ्य के माध्यम से इसे भविष्य की स्वास्थ्य प्रणाली में एक मजबूत स्थान दिलाया जा सकता है।
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