AIIMS Breakthrough: 5 छोटे चीरे में पेनाइल-वल्वर कैंसर सर्जरी, H-RIL तकनीक से इलाज में क्रांति

AIIMS Breakthrough: 5 छोटे चीरे में पेनाइल-वल्वर कैंसर सर्जरी, H-RIL तकनीक से इलाज में क्रांति
नई दिल्ली स्थित All India Institute of Medical Sciences ने पेनाइल और वल्वर कैंसर के इलाज में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान द्वारा विकसित ‘एच-आरआईएल’ (हाइपोगैस्ट्रिक रोबोटिक इलियो-इंग्वाइनल लिम्फैडेनेक्टॉमी) तकनीक के जरिए अब महज पांच छोटे चीरे लगाकर कैंसरग्रस्त लिम्फ नोड्स को सुरक्षित तरीके से हटाया जा सकता है। इस नई तकनीक से मरीजों को कम दर्द, कम जटिलता और तेजी से रिकवरी जैसी महत्वपूर्ण राहत मिल रही है।
सटीक सर्जरी और बेहतर परिणाम की उम्मीद
All India Institute of Medical Sciences के बीआरए-आईआरसीएच में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक फेमोरल ट्रायंगल के निचले हिस्से तक लिम्फ नोड्स की सटीक सफाई संभव बनाती है, जो पारंपरिक सर्जरी में चुनौतीपूर्ण होती थी। इस प्रक्रिया में ‘एन-ब्लॉक’ तकनीक के जरिए पूरे इंगुइनल नोडल पैकेट को एक साथ हटाया जाता है, जिससे आसपास के टिशू को कम नुकसान होता है और बेहतर ऑन्कोलॉजिकल परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
कम चीरे, कम समय और ज्यादा प्रभाव
नई एच-आरआईएल तकनीक ने सर्जरी की जटिलता को काफी हद तक कम कर दिया है। पहले जहां पारंपरिक सर्जरी में बड़े चीरे लगाने पड़ते थे और रोबोटिक तकनीक में भी लगभग 15 छोटे चीरे लगते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर केवल पांच रह गई है। इसके साथ ही रोबोटिक सिस्टम को बार-बार री-पोजिशन करने की जरूरत भी कम हो गई है और पूरी प्रक्रिया दो डॉकिंग में ही पूरी हो जाती है, जिससे ऑपरेशन का समय भी घटता है।
जटिल मरीजों के लिए भी प्रभावी विकल्प
यह तकनीक खासतौर पर उन मरीजों के लिए फायदेमंद है जिनमें इंगुइनल लिम्फ नोड्स बड़े हो जाते हैं या जांघ पर पोर्ट लगाना संभव नहीं होता, जैसे जलने या त्वचा रोग से प्रभावित मरीज। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक पेनाइल और वल्वर कैंसर के इलाज में गेम-चेंजर साबित हो सकती है। अब तक 30 से 70 वर्ष आयु वर्ग के छह मरीजों पर इस तकनीक से सफल सर्जरी की जा चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
इस नवाचार को हाल ही में Association of Robotic and Innovative Surgeons के सम्मेलन में ‘बेस्ट सर्जिकल इनोवेशन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी सरलता, सटीकता और कम जटिलता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है, और आने वाले समय में भारत रोबोटिक कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व करता नजर आ सकता है।
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