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नई दिल्ली: तंबाकू छोड़ने में मददगार नहीं ई-सिगरेट : AIIMS

नई दिल्ली: -एम्स के दो विशेषज्ञों ने की थी ई -सिगरेट से प्रतिबंध हटाने की मांग

नई दिल्ली, 10 अगस्त : ई-सिगरेट का उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यह तंबाकू की लत छुड़ाने या कम करने में मददगार नहीं है। ऐसे सभी दावे भ्रामक और चिंताजनक हैं जिनके आधार पर ई -सिगरेट को लाभदायक साबित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस आशय का बयान एम्स दिल्ली ने रविवार को जारी किया।

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एम्स निदेशक डॉ. एम.श्रीनिवास ने कहा, हम धूम्रपान और ई-सिगरेट सहित निकोटीन के उपयोग के खिलाफ हैं। विशेष रूप से युवाओं के बीच ई-सिगरेट को बढ़ावा देने का पूर्णतया विरोध करते हैं। इस संबंध में पहले भी चेतावनी जारी की जा चुकी है। एम्स निदेशक ने स्पष्ट रूप से कहा है कि संस्थान पूरी तरह से ई-सिगरेट का विरोध करता है। वहीं, एम्स प्रवक्ता डॉ. रीमा दादा ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन वितरण प्रणाली (ईएनडीएस) पर एम्स दिल्ली के दो डॉक्टरों की राय से संस्थान असहमत है, जिसमें धूम्रपान छोड़ने के क्रम में ई -सिगरेट को लाभदायक बताया गया है। उन्होंने कहा, ई-सिगरेट सहित सभी प्रकार के तंबाकू और निकोटीन के उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। डॉ. दादा ने कहा कि एम्स दिल्ली, भारत सरकार द्वारा 2019 में ई-सिगरेट पर लगाए गए देशव्यापी प्रतिबंध का समर्थन करता है और ठोस, वैज्ञानिक और सतर्क जन स्वास्थ्य नीतियों के लिए खड़ा रहेगा।

एम्स तंबाकू निषेध क्लीनिक
उन्होंने बताया कि एम्स अब तक हजारों लोगों को तंबाकू छोड़ने के लिए परामर्श और चिकित्सा सहायता प्रदान कर चुका है। इसके लिए देश में अपनी तरह का पहला ‘तंबाकू निषेध क्लीनिक’ (टीसीसी) एम्स में काम कर रहा है। देश में युवाओं में निकोटीन का उपयोग एक संभावित खतरे के रूप में लगातार बढ़ रहा है, इसलिए एम्स ‘सुरक्षित विकल्प’ होने का दावा करने वाले ई-सिगरेट के भ्रामक विज्ञापनों के प्रति कड़ी चेतावनी देता है, खासकर जब इसका उपयोग अनियमित या मनोरंजक वातावरण में किया जा रहा हो।

क्या है मामला ?
एम्स दिल्ली के दो विशेषज्ञों डॉ. अभिषेक शंकर और डॉ. वैभव साहनी ने इस महीने जेसीओ ग्लोबल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित एक टिप्पणी में कहा है कि ई-सिगरेट लोगों को धूम्रपान छोड़ने में मदद करती है। इस बात के भी पर्याप्त प्रमाण हैं कि निकोटीन वाली ई-सिगरेट की धूम्रपान छोड़ने की दर निकोटीन रहित ई-सिगरेट की तुलना में ज़्यादा होती है। लिहाजा, ऐसे उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध ई -सिगरेट की मांग को अवैध विपणन की ओर ले जा सकता है। इसलिए ई -सिगरेट के प्रतिबंध पर पुनर्विचार जरूरी है।

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