उत्तर प्रदेश, नोएडा: दस्तावेज जाली बताकर क्लेम देने से मना नहीं कर सकती बीमा कंपनी

अमर सैनी
उत्तर प्रदेश, नोएडा। दस्तावेज जाली बताकर बीमा कंपनी इलाज में खर्च के दावे को खारिज नहीं कर सकती है। उसे जाली दस्तावेज होने का प्रमाण देना होगा। ऐसे ही एक मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को इलाज में खर्च राशि का ब्याज समेत 30 दिन में भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने सुनवाई की।
नोएडा के सेक्टर-33 निवासी ताराचंद्रा ने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस से 6 लाख रुपये के बीमा कवर की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। पॉलिसी 11 जुलाई 2020 से 10 जुलाई 2021 तक वैध थी। बीमा कंपनी को 14,803 रुपये के प्रीमियम का भुगतान किया। 26 अप्रैल 2021 को निमोनिया से पीडित होने पर ताराचंद्रा को काशी अस्पताल एवं शल्प चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद 3 जून 2021 को अस्पताल में व्यय के 4,6,4143 रुपये का दावा बीमा कंपनी से किया। 17 अक्तूबर को बीमा कंपनी ने इलाज खर्च के दावे को निरस्त कर दिया। इलाज में खर्च राशि का क्लेम दिलाने के लिए जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया।

आयोग में बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दावा धोखाधड़ी के आधार पर दायर किया गया, इसलिए पॉलिसी रद्द कर दी गई, क्योंकि दावा झूठे और मनगढ़ंत दस्तावेज पर आधारित है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने माना कि बीमा कंपनी यह साबित करने में असमर्थ है कि दस्तावेज जाली और मनगढ़ंत हैं और बीमा कंपनी ने क्लेम के लिए दायर दावे को खारिज करके सेवा में कमी की है। ऐसे में बीमा कंपनी को आयोग ने निर्देश दिया कि वह शिकायत की तारीख से भुगतान की तारीख तक 6 फीसदी ब्याज समेत 4,64,143 रुपये का भुगतान करेगी। वाद व्यय के पांच हजार रुपये और पांच हजार रुपये मानसिक संताप के भी देने होंगे।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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