Personal Loan Cyber Fraud: फर्जी लोन स्वीकृति पत्र भेजकर ठगी करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार, 10 प्रतिशत कमीशन पर साइबर ठगों को देते थे बैंक खाते
नोएडा। पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह से जुड़े दो आरोपियों को नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह लोन की जरूरत वाले लोगों का डाटा जुटाकर उनसे संपर्क करता था और भरोसा दिलाने के लिए फर्जी लोन स्वीकृति पत्र भेजता था। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम जमा कराकर संपर्क बंद कर दिया जाता था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को बुधवार को गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी से गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तुषार और सुमित के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि दोनों अपने बैंक खातों को साइबर ठगी की रकम मंगाने के लिए कथित रूप से उपलब्ध कराते थे।
पुलिस के मुताबिक साइबर ठगी करने वाला गिरोह सबसे पहले ऐसे लोगों का डाटा जुटाता था, जिन्हें पर्सनल लोन की जरूरत होती थी। इसके बाद संभावित पीड़ितों को फोन करके आसानी से लोन दिलाने का भरोसा दिया जाता था।
पीड़ित को विश्वास में लेने के लिए कथित रूप से फर्जी लोन स्वीकृति पत्र तैयार कर भेजा जाता था। स्वीकृति पत्र मिलने के बाद लोगों को लगता था कि उनका लोन मंजूर हो चुका है।
इसके बाद लोन की रकम जारी कराने से पहले प्रोसेसिंग फीस और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर पैसे जमा करने के लिए कहा जाता था। पीड़ित आरोपियों की बातों पर भरोसा करके बताए गए बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर देते थे।
आरोप है कि रकम बैंक खाते में पहुंचने के बाद साइबर ठग पीड़ित से संपर्क बंद कर देते थे। इसके बाद न तो लोन की रकम मिलती थी और न ही प्रोसेसिंग फीस के नाम पर जमा कराए गए पैसे वापस किए जाते थे।
पूछताछ और जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरफ्तार दोनों आरोपी अपने बैंक खाते कथित साइबर ठगों को इस्तेमाल करने के लिए उपलब्ध कराते थे। इसके बदले उन्हें ठगी की रकम का 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था।
पुलिस के अनुसार ठगी की रकम खाते में आने के बाद आरोपी अपना 10 प्रतिशत कमीशन काट लेते थे और बाकी रकम साइबर अपराधियों को दे देते थे।
जांच में तुषार के बैंक खाते में करीब 1.20 लाख रुपये और सुमित के बैंक खाते में करीब 2.20 लाख रुपये आने की जानकारी सामने आई है। इस तरह दोनों खातों में कुल 3.40 लाख रुपये का लेनदेन मिला है।
पुलिस दोनों बैंक खातों की विस्तृत जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इन खातों में किन-किन स्रोतों से रकम आई और बाद में इसे किन खातों या व्यक्तियों तक पहुंचाया गया।
पुलिस के मुताबिक दोनों बैंक खातों को लेकर राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायतें दर्ज हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु से इन खातों के खिलाफ दो शिकायतें मिलने की जानकारी सामने आई है।
इन शिकायतों के आधार पर भी संबंधित लेनदेन की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपियों के खातों का इस्तेमाल अन्य राज्यों के लोगों से की गई कथित साइबर ठगी में किस स्तर तक हुआ।
यह कार्रवाई साइबर क्राइम थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 145/2025 से संबंधित है। इसी मामले में पुलिस पहले भी दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस के मुताबिक पूर्व में गिरफ्तार दोनों आरोपियों को 15 दिसंबर 2025 को जेल भेजा गया था। अब तुषार और सुमित की गिरफ्तारी के बाद मामले से जुड़े अन्य लोगों की तलाश और जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
जांच का दायरा केवल गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों तक सीमित नहीं रखा गया है। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्ध बैंक खातों, वेबसाइट और पूरे डिजिटल नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है।
फर्जी लोन स्वीकृति पत्र किस माध्यम से तैयार किए जाते थे, पीड़ितों का डाटा कहां से हासिल किया जाता था और लोगों से संपर्क करने के लिए किन मोबाइल नंबरों तथा डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया गया, इन बिंदुओं पर भी जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जांच के दौरान गिरोह से जुड़े जिन अन्य लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने लोगों से साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहने की अपील की है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते की जानकारी, आधार कार्ड, पैन कार्ड या अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज साझा नहीं करने की सलाह दी गई है।
इसके साथ ही किसी भी पर्सनल लोन ऑफर पर भरोसा करने से पहले संबंधित बैंक या अधिकृत वित्तीय संस्था से उसकी पुष्टि करने की सलाह दी गई है। संदिग्ध लिंक, फर्जी स्वीकृति पत्र या प्रोसेसिंग फीस के नाम पर अनजान खातों में रकम भेजने से बचने को कहा गया है।


