Eastern Peripheral Connectivity: ग्रेटर नोएडा से ईस्टर्न पेरिफेरल तक बनेगी 105 मीटर चौड़ी सड़क, 10 लेन के साथ चार सर्विस लेन; बनेंगे तीन ओवरब्रिज

Eastern Peripheral Connectivity: ग्रेटर नोएडा से ईस्टर्न पेरिफेरल तक बनेगी 105 मीटर चौड़ी सड़क, 10 लेन के साथ चार सर्विस लेन; बनेंगे तीन ओवरब्रिज

नोएडा। ग्रेटर नोएडा की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए 105 मीटर चौड़ी सड़क को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (ईपीई) से जोड़ा जाएगा। ग्रेटर नोएडा फेस-1 में इस सड़क का करीब छह किलोमीटर हिस्सा पहले ही बनाया जा चुका है। अब फेस-2 में ग्राम जुनपत से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक करीब 12 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद ग्रेटर नोएडा फेस-1, फेस-2 और डीएनजीआईआर क्षेत्र को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

ग्रेटर नोएडा में औद्योगिक, आवासीय और संस्थागत गतिविधियों के विस्तार को देखते हुए सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 105 मीटर चौड़ी सड़क के जरिए शहर के नए विकसित होने वाले क्षेत्रों को सीधे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है।

ग्रेटर नोएडा फेस-1 में इस सड़क का लगभग छह किलोमीटर लंबा हिस्सा पहले से बन चुका है। अब परियोजना के अगले हिस्से को ग्रेटर नोएडा फेस-2 में आगे बढ़ाया जाएगा।

योजना के अनुसार ग्राम जुनपत से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक करीब 12 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी। यह सड़क ग्रेटर नोएडा के मौजूदा और भविष्य में विकसित होने वाले क्षेत्रों के लिए प्रमुख संपर्क मार्ग के रूप में काम करेगी।

सड़क के प्रस्तावित अलाइनमेंट में कई महत्वपूर्ण परिवहन कॉरिडोर आ रहे हैं। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के दौरान मार्ग में रेलवे लाइन, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की लिंक लाइन और जीटी रोड आएंगे।

इन तीनों स्थानों पर निर्बाध यातायात सुनिश्चित करने के लिए तीन ओवरब्रिज बनाने की योजना है। इससे रेलवे लाइन, फ्रेट कॉरिडोर और जीटी रोड को पार करने के दौरान वाहनों को रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और यातायात का संचालन सुचारु रूप से किया जा सकेगा।

105 मीटर चौड़ी इस सड़क को बड़े यातायात दबाव को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जाएगा। मुख्य सड़क को 10 लेन का बनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त दोनों तरफ कुल चार सर्विस लेन विकसित करने की योजना है।

सर्विस लेन से आसपास के आवासीय, औद्योगिक और अन्य क्षेत्रों का स्थानीय यातायात मुख्य सड़क से अलग रखा जा सकेगा। इससे मुख्य मार्ग पर लंबी दूरी के वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

परियोजना में निर्माण और भूमि अधिग्रहण की जिम्मेदारियां अलग-अलग एजेंसियों के बीच बांटी गई हैं। सड़क निर्माण पर आने वाला खर्च भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से वहन किया जाएगा।

वहीं सड़क निर्माण के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की होगी। परियोजना के दायरे में ग्रेटर नोएडा फेस-1 और फेस-2 के साथ डीएनजीआईआर क्षेत्र की भूमि भी शामिल है।

डीएनजीआईआर क्षेत्र का विकास नोएडा प्राधिकरण की ओर से किया जा रहा है। इसलिए इस क्षेत्र में प्रस्तावित सड़क के दायरे में आने वाली आवश्यक भूमि का अधिग्रहण नोएडा प्राधिकरण करेगा।

भूमि अधिग्रहण पर आने वाली कुल लागत को नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बीच बराबर बांटा जाएगा। दोनों प्राधिकरण भूमि अधिग्रहण की लागत 50:50 के अनुपात में वहन करेंगे।

इस व्यवस्था के तहत एनएचएआई सड़क और उससे संबंधित निर्माण कार्य का खर्च उठाएगा, जबकि नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने पर होने वाले खर्च की जिम्मेदारी संभालेंगे।

परियोजना पूरी होने के बाद ग्रेटर नोएडा फेस-1 और फेस-2 के साथ डीएनजीआईआर को भी ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक सीधा और बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा। इससे इन क्षेत्रों से अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों और एनसीआर के विभिन्न हिस्सों तक आवागमन आसान होने की उम्मीद है।

विशेष रूप से ग्रेटर नोएडा फेस-2 और डीएनजीआईआर जैसे भविष्य के विकास क्षेत्रों के लिए यह सड़क महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इन क्षेत्रों में औद्योगिक और अन्य विकास परियोजनाओं के विस्तार के साथ बड़े सड़क नेटवर्क की आवश्यकता भी बढ़ेगी।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद अब इस परियोजना से संबंधित आगे की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। भूमि अधिग्रहण और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सड़क निर्माण को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होगा।

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