New Delhi : “बीजेपी का विजय रथ लगातार आगे बढ़ेगा, पंजाब में भी हमारी सरकार बनेगी”- अरुण सिंह

New Delhi : वरिष्ठ भाजपा नेता एवं राज्यसभा सांसद ने कहा—अनुभव और नई पीढ़ी के समन्वय से संगठन हो रहा मजबूत; मोदी-योगी विकास मॉडल, 2027 के चुनाव, राहुल गांधी, अयोध्या और पंजाब की राजनीतिक संभावनाओं पर खुलकर रखी अपनी बात

अरुण सिंह, राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता से विशेष बातचीत
साक्षात्कार: डॉ. अनिल सिंह
एडिटर, STAR Views & Top Story

भूमिका

भारतीय जनता पार्टी संगठनात्मक बदलाव के एक नए दौर से गुजर रही है। पार्टी जहां नई पीढ़ी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में आगे ला रही है, वहीं अनुभवी नेताओं और पुराने संगठनात्मक कार्यकर्ताओं की भूमिका को भी बरकरार रखते हुए भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों की तैयारी कर रही है। 2027 में उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनाव और उसके बाद 2029 का लोकसभा चुनाव भाजपा के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद अरुण सिंह का मानना है कि पार्टी की सबसे बड़ी ताकत अनुभवी कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन और युवा पीढ़ी के उत्साह के बीच संतुलन बनाने की उसकी क्षमता है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकास एजेंडा, संगठनात्मक अनुशासन और देश के नए क्षेत्रों एवं सामाजिक वर्गों तक भाजपा का विस्तार आने वाले चुनावों में पार्टी की राजनीतिक दिशा तय करेगा।

Top Story के लिए डॉ. अनिल सिंह, एडिटर, STAR Views & Top Story से इस विशेष बातचीत में अरुण सिंह ने भाजपा में हो रहे संगठनात्मक बदलाव, मोदी सरकार के कामकाज, युवाओं की आकांक्षाओं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के विकास, अयोध्या के राजनीतिक महत्व, राहुल गांधी और विपक्ष की राजनीति, भाजपा के भीतर कथित मतभेदों तथा पंजाब में पार्टी की भविष्य की रणनीति पर विस्तार से अपनी बात रखी।

डॉ. अनिल सिंह: भाजपा में हाल के दिनों में महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। पार्टी नई पीढ़ी को प्रमुख जिम्मेदारियों में आगे ला रही है, लेकिन साथ ही अनुभवी नेताओं को भी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका दी जा रही है। क्या इसे 2027 के विधानसभा चुनावों और अंततः 2029 के लोकसभा चुनाव की दीर्घकालीन तैयारी के रूप में देखा जाना चाहिए?

अरुण सिंह: भारतीय जनता पार्टी हमेशा निरंतरता और परिवर्तन—दोनों में विश्वास करती है। युवा नेताओं और कार्यकर्ताओं को अवसर देना भाजपा के लिए कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह हमारी संगठनात्मक संस्कृति का हिस्सा है। इसके साथ ही वरिष्ठ नेताओं और लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं का अनुभव तथा मार्गदर्शन भी हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

हमारी असली ताकत इन्हीं दोनों को साथ लेकर चलने में है—एक तरफ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का अनुभव और दूसरी तरफ नई पीढ़ी का उत्साह, ऊर्जा और नए विचार। जब अनुभव और युवा ऊर्जा एक साझा उद्देश्य के लिए मिलकर काम करते हैं, तो संगठन स्वाभाविक रूप से मजबूत होता है।

इसी संगठनात्मक सोच ने भारतीय जनता पार्टी को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी का भौगोलिक, सामाजिक और राजनीतिक विस्तार हुआ है। हमारे कार्यकर्ता देशभर में सक्रिय हैं। उनका उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि समाज के बीच रहकर जनता की सेवा करना भी है।

स्वाभाविक रूप से हर राजनीतिक दल भविष्य के चुनावों की तैयारी करता है, लेकिन भाजपा में संगठन को मजबूत करने की प्रक्रिया केवल चुनाव आने पर शुरू नहीं होती। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।

डॉ. अनिल सिंह: आज किसी भी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक देश की युवा पीढ़ी की बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा करना है। युवाओं के कुछ वर्गों में असंतोष और विरोध भी देखने को मिला है। रोजगार, अवसर और आर्थिक प्रगति की उनकी अपेक्षाओं को पूरा करने में मोदी सरकार और भाजपा कितनी सक्षम है?

अरुण सिंह: आज की स्थिति को समझने के लिए हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत में आए बदलाव को देखना होगा।

जो युवा आज 25-26 वर्ष का है, वह 12 वर्ष पहले केवल 13-14 वर्ष का रहा होगा। इसलिए नई पीढ़ी के बहुत से लोगों ने उस समय की परिस्थितियों को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा होगा—नीतिगत जड़ता, भ्रष्टाचार के आरोप, निवेशकों में विश्वास की कमी और भारत को लेकर बनी नकारात्मक धारणा जैसी स्थितियां थीं।

पिछले 12 वर्षों में इसमें बड़ा बदलाव आया है। आप इंफ्रास्ट्रक्चर को देखिए। देश में राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे, मेट्रो नेटवर्क, एयरपोर्ट और बंदरगाहों का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ है। नई पीढ़ी की परिवहन परियोजनाओं पर काम हो रहा है। भारत सेमीकंडक्टर, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

शिक्षा और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में भी बड़ा विस्तार हुआ है। AIIMS, IIT, IIM और मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों की संख्या और क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, उद्यमिता और इनोवेशन के क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं।

आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। यह अपने आप नहीं हुआ है। इसके पीछे लगातार सुधार, पारदर्शिता, इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और सरकार की स्पष्ट नीतिगत दिशा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने देश के सामने विकसित भारत का संकल्प रखा है। इस यात्रा के सबसे बड़े भागीदार हमारे युवा होंगे। उनकी आकांक्षाएं बहुत बड़ी हैं और हमारी जिम्मेदारी है कि उनके लिए लगातार नए अवसर पैदा किए जाएं।

डॉ. अनिल सिंह: 2027 का चुनावी दौर राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में चुनाव होंगे। क्या आपको विश्वास है कि भाजपा अपनी मौजूदा चुनावी गति को बनाए रखते हुए इसे 2029 के लोकसभा चुनाव तक आगे ले जा सकेगी?

अरुण सिंह: मुझे पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी का विजय रथ लगातार आगे बढ़ता रहेगा।

उत्तर प्रदेश को ही देखिए। 2017 से पहले कानून-व्यवस्था राज्य की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक थी। अपराधियों के प्रभाव, फिरौती, संपत्तियों पर अवैध कब्जे और सांप्रदायिक तनाव जैसी घटनाओं को लेकर गंभीर सवाल उठते थे। आम नागरिकों में भी असुरक्षा की भावना रहती थी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में परिस्थितियों में बदलाव आया है। सरकार ने संगठित अपराध और माफिया के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है और इसके साथ-साथ विकास की गति को भी तेज किया है।

आज उत्तर प्रदेश की चर्चा एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट, निवेश, औद्योगिक विकास और बेहतर कनेक्टिविटी के संदर्भ में भी हो रही है। यह अपने आप में बहुत बड़ा परिवर्तन है।

जनता सरकारों की तुलना अपने अनुभव के आधार पर करती है। लोगों को पिछली सरकारों का दौर भी याद है और वे आज हो रहे बदलावों को भी देख रहे हैं। इसलिए मुझे विश्वास है कि भाजपा को उत्तर प्रदेश की जनता का समर्थन आगे भी मिलता रहेगा।

डॉ. अनिल सिंह: अयोध्या कई दशकों से भाजपा के राजनीतिक और सांस्कृतिक विमर्श के केंद्र में रही है। इसके बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव में अयोध्या और उसके आसपास के नतीजों ने राजनीतिक पर्यवेक्षकों को चौंकाया। इसके साथ ही कुछ वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर भी आरोप सामने आए। क्या भाजपा ने 2024 के जनादेश से कोई राजनीतिक सबक लिया है और क्या इन मुद्दों का असर 2027 के चुनाव पर पड़ सकता है?

अरुण सिंह: हर चुनाव राजनीतिक दलों को कुछ न कुछ सीख देता है और भारतीय जनता पार्टी चुनावी परिणामों को हमेशा गंभीरता से लेती है। लेकिन किसी एक चुनाव परिणाम को अयोध्या में हो रहे व्यापक सांस्कृतिक और विकासात्मक परिवर्तन को जनता द्वारा नकारने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इसके बाद हुए चुनावी घटनाक्रम ने भी दिखाया है कि राजनीतिक परिस्थितियां बदलती रहती हैं।

जहां तक किसी तरह की अनियमितता के आरोपों का सवाल है, हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। यदि सरकार के संज्ञान में कोई गड़बड़ी आती है, तो उसकी जांच होनी चाहिए। अगर कोई दोषी पाया जाता है तो कानून के अनुसार उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। राजनीतिक कारणों से किसी भी व्यक्ति को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।

साथ ही देश की जनता राम मंदिर आंदोलन के इतिहास को अच्छी तरह जानती है। अलग-अलग राजनीतिक दलों ने कई दशकों तक इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया, यह भी लोगों को याद है और यह भी कि मंदिर निर्माण के पक्ष में कौन लगातार खड़ा रहा।

यह बदलाव केवल अयोध्या तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के कई महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्रों का पुनर्विकास हुआ है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, उज्जैन का महाकाल लोक और मां विंध्यवासिनी क्षेत्र का विकास इसके उदाहरण हैं।

हमारे लिए आधुनिक विकास और सांस्कृतिक पहचान एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। दोनों एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

डॉ. अनिल सिंह: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक प्रभाव लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। दूसरी तरफ राहुल गांधी ने भी पिछले कुछ वर्षों में खुद को नए तरीके से प्रस्तुत करने और सरकार के खिलाफ अधिक आक्रामक राजनीतिक अभियान चलाने का प्रयास किया है। क्या आप मानते हैं कि राहुल गांधी की राजनीतिक स्वीकार्यता और लोकप्रियता बढ़ी है?

अरुण सिंह: लोकतंत्र में प्रत्येक विपक्षी नेता को अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाने और सरकार को चुनौती देने का पूरा अधिकार है। लेकिन अंततः लोकप्रियता की वास्तविक परीक्षा जनता के बीच ही होती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए और मेरा मानना है कि बड़ी संख्या में देशवासियों के लिए भी गर्व का विषय है। उन्हें अनेक देशों ने अपने उच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया है और दुनिया की विभिन्न संसदों तथा महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंचों को संबोधित करने का अवसर मिला है। यह आज विश्व में भारत के बढ़ते सम्मान को भी दर्शाता है।

राहुल गांधी से हमारा मूल मतभेद उनकी राजनीतिक कार्यशैली को लेकर है। जब वे विदेश जाते हैं और भारत सरकार, देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं या भारत की आंतरिक परिस्थितियों की आलोचना करते हैं, तो हमारा मानना है कि कई बार सरकार की आलोचना और देश की नकारात्मक छवि प्रस्तुत करने के बीच की सीमा धुंधली हो जाती है।

विपक्ष को सरकार की आलोचना अवश्य करनी चाहिए। यह उसकी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। लेकिन आलोचना रचनात्मक होनी चाहिए और ऐसी होनी चाहिए जिससे भारत मजबूत हो, न कि देश की संस्थाओं के प्रति विश्वास कमजोर हो।

अंततः जनता ही तय करेगी कि वह किसकी राजनीति पर विश्वास करती है। केवल मीडिया में दिखाई देना राजनीतिक लोकप्रियता का प्रमाण नहीं हो सकता। चुनाव और जनता का विश्वास ही उसकी वास्तविक कसौटी हैं।

डॉ. अनिल सिंह: राजनीतिक और मीडिया हलकों में लगातार ऐसी अटकलें लगती रही हैं कि उत्तर प्रदेश के नेतृत्व और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं। क्या दिल्ली और लखनऊ के बीच किसी तरह के राजनीतिक टकराव की खबरों में कोई सच्चाई है?

अरुण सिंह: नहीं। ऐसी बहुत-सी अटकलें सोशल मीडिया के माध्यम से पैदा की जाती हैं और राजनीतिक विरोधी भी इस तरह का नैरेटिव बनाने की कोशिश करते हैं।

भारतीय जनता पार्टी एक अनुशासित संगठन है। इतनी बड़ी राजनीतिक पार्टी में स्वाभाविक रूप से अलग-अलग विषयों पर चर्चा होती है, सुझाव आते हैं और विचार-विमर्श होता है। लेकिन विचार-विमर्श को मतभेद या विभाजन नहीं माना जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रीय नेतृत्व, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूरा संगठन एक साझा उद्देश्य के लिए काम कर रहे हैं—विकास, सुशासन, जनसेवा और भारत को मजबूत बनाना।

हमारे कार्यकर्ता एकजुट हैं। वे देश की एकता, अखंडता और विकास के संकल्प के साथ पूरे देश में सामाजिक और राजनीतिक कार्य कर रहे हैं। पार्टी की एकजुटता को लेकर किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

डॉ. अनिल सिंह: पंजाब भाजपा के लिए लंबे समय से एक चुनौतीपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र रहा है। क्या पार्टी शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन की संभावना तलाश सकती है या इस बार भाजपा अपने दम पर एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनने की रणनीति पर आगे बढ़ेगी? सबसे महत्वपूर्ण सवाल—क्या आपको वास्तव में विश्वास है कि भाजपा पंजाब में सरकार बना सकती है?

अरुण सिंह: मुझे पूरा विश्वास है कि भारतीय जनता पार्टी में पंजाब में सरकार बनाने की क्षमता है।

एक समय ऐसा था जब लोग कहते थे कि भाजपा असम, हरियाणा, त्रिपुरा या ओडिशा जैसे राज्यों में बड़ी राजनीतिक ताकत नहीं बन सकती। लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं क्योंकि पार्टी ने अपने संगठन का विस्तार किया, नए सामाजिक वर्गों के साथ संबंध बनाए और जनता के सामने विकास का विकल्प प्रस्तुत किया।

पंजाब में भी ऐसा परिवर्तन संभव है।

पंजाब की जनता विकास चाहती है, निवेश चाहती है, रोजगार के अवसर चाहती है और अपने बच्चों के लिए सुरक्षित एवं बेहतर भविष्य चाहती है। पंजाब के लोग भारत की आर्थिक विकास यात्रा में पूरी ताकत के साथ शामिल होना चाहते हैं। साथ ही नशे की समस्या और शासन से जुड़े कई सवाल राज्य में गंभीर चिंता के विषय बने हुए हैं।

हमारा उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी के विकास एजेंडे को पंजाब के हर वर्ग—किसान, युवा, व्यापारी, उद्यमी, महिलाएं और पेशेवर वर्ग—तक पहुंचाना है।

राजनीतिक रणनीति और गठबंधन से जुड़े फैसले परिस्थितियों के अनुसार पार्टी नेतृत्व करता है। लेकिन हमारा बड़ा उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है—पंजाब में भाजपा को जमीनी स्तर पर मजबूत करना और एक विश्वसनीय राजनीतिक एवं शासकीय विकल्प के रूप में स्थापित करना।

मुझे लगता है कि पंजाब की राजनीतिक जमीन बदल रही है और मुझे विश्वास है कि भाजपा वहां सरकार बनाने में सफल होगी।

डॉ. अनिल सिंह: आपने भाजपा संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। पार्टी में चल रहे बदलावों के बीच स्वाभाविक रूप से आपकी अगली जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित विस्तार की अटकलें भी समय-समय पर सामने आती हैं। क्या आप स्वयं किसी नई जिम्मेदारी की उम्मीद कर रहे हैं?

अरुण सिंह: मैं राजनीति को इस दृष्टि से नहीं देखता। मैं स्वयं को भारतीय जनता पार्टी का एक सामान्य कार्यकर्ता मानता हूं।

मेरी राजनीतिक और संगठनात्मक यात्रा में पार्टी ने मुझे जो भी जिम्मेदारी दी, मैंने उसे पूरी ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण के साथ निभाने का प्रयास किया है। मैंने कभी किसी पद को ध्यान में रखकर काम नहीं किया।

भाजपा के कार्यकर्ता के लिए जिम्मेदारी संगठन तय करता है। भविष्य में पार्टी नेतृत्व मुझे जो भी काम देगा, मैं उसी प्रतिबद्धता और ईमानदारी से उसे पूरा करूंगा। मेरे लिए पद से अधिक महत्वपूर्ण संगठन और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना है।

निष्कर्ष

अरुण सिंह के इस साक्षात्कार से भाजपा की आगामी राजनीतिक रणनीति के कई महत्वपूर्ण संकेत सामने आते हैं। पार्टी एक ओर नई पीढ़ी को आगे लाकर संगठनात्मक बदलाव कर रही है, तो दूसरी ओर अनुभवी नेतृत्व और संगठनात्मक निरंतरता को बनाए रखने की कोशिश भी स्पष्ट दिखाई देती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकास मॉडल, संगठनात्मक अनुशासन और उन राज्यों में विस्तार, जहां भाजपा परंपरागत रूप से अपेक्षाकृत कमजोर रही है, आने वाले चुनावी दौर में पार्टी की रणनीति के प्रमुख आधार दिखाई देते हैं।

उत्तर प्रदेश इस पूरी रणनीति के केंद्र में बना रहेगा। भाजपा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन और विकास के रिकॉर्ड को जनता के सामने रखते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव से मिले राजनीतिक संकेतों को भी ध्यान में रखेगी। दूसरी तरफ पंजाब भाजपा के लिए एक बिल्कुल अलग राजनीतिक चुनौती है। इसके बावजूद अरुण सिंह का मानना है कि जिस प्रकार भाजपा ने कई ऐसे राज्यों में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की जहां कभी उसकी सरकार बनना कठिन माना जाता था, उसी प्रकार पंजाब में भी परिस्थितियां बदल सकती हैं।

राहुल गांधी और विपक्ष को लेकर उनकी टिप्पणियां भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी वैचारिक एवं राजनीतिक संघर्ष को रेखांकित करती हैं। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व के बीच कथित मतभेदों की चर्चाओं को पूरी तरह खारिज करते हुए भाजपा को एकजुट संगठन बताया।

अपने राजनीतिक भविष्य और संभावित नई जिम्मेदारी से जुड़े सवाल पर अरुण सिंह का जवाब भी उल्लेखनीय रहा। किसी पद या मंत्री पद की अपेक्षा व्यक्त करने के बजाय उन्होंने स्वयं को पार्टी का एक सामान्य कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि नेतृत्व उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगा, वे उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे।

2027 के महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों और उसके बाद 2029 के लोकसभा चुनाव की ओर बढ़ती भारतीय राजनीति में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा संगठनात्मक बदलाव, नई पीढ़ी, शासन के अपने रिकॉर्ड और नए राज्यों में विस्तार की रणनीति के बीच किस तरह संतुलन स्थापित करती है। अरुण सिंह जिस “विजय रथ” की बात कर रहे हैं, उसकी अगली बड़ी परीक्षा भी इन्हीं चुनावी मैदानों में होगी।

— Top Story के लिए विशेष साक्षात्कार

साक्षात्कार: डॉ. अनिल सिंह
एडिटर, STAR Views & Top Story

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