Noida Theft Gang: सोसाइटी के फ्लैटों को बनाते थे निशाना, महिला समेत तीन शातिर चोर गिरफ्तार; लाखों की ज्वैलरी, कैश और इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद
रिपोर्ट: अमर सैनी
नोएडा। सोसाइटी और फ्लैटों में रेकी करने के बाद चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले अंतरजनपदीय गिरोह का थाना सेक्टर-113 पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से लाखों रुपये की ज्वैलरी, 3.5 लाख रुपये नकद, लैपटॉप, टैबलेट और मोबाइल फोन समेत बड़ी मात्रा में चोरी का सामान बरामद किया गया है। वारदात में इस्तेमाल की जाने वाली ERTIGA कार भी पुलिस ने बरामद की है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कैलाश उर्फ दिवाकर, इरफान उर्फ इमरान और सोनाली के रूप में हुई है। तीनों को सेक्टर-123 स्थित श्मशान घाट के पास से गिरफ्तार किया गया। आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने स्थानीय स्तर पर सूचनाएं जुटाने के साथ इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद ली थी।
थाना सेक्टर-113 क्षेत्र में सोसाइटी और फ्लैटों में हुई चोरी की घटनाओं की जांच के दौरान पुलिस को एक गिरोह के सक्रिय होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद संदिग्ध लोगों की गतिविधियों और वारदातों के तरीके का विश्लेषण किया गया। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और लोकल इंटेलिजेंस के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनकी तलाश शुरू की।
पुलिस को सूचना मिली कि गिरोह से जुड़े आरोपी सेक्टर-123 क्षेत्र में मौजूद हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने श्मशान घाट के आसपास घेराबंदी की और तीनों आरोपियों को पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों और उनके पास मौजूद सामान की जांच की गई तो बड़ी मात्रा में कथित तौर पर चोरी किया गया सामान बरामद हुआ।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से पीली और सफेद धातु की ज्वैलरी बरामद की गई है। इसके अलावा पांच लैपटॉप, दो टैबलेट और छह मोबाइल फोन भी मिले हैं। आरोपियों के पास से 3.5 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं, जिन्हें पुलिस घरों में हुई चोरी की वारदातों से जुड़ा बता रही है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से एक ERTIGA कार भी बरामद की है। आरोप है कि इसी कार का इस्तेमाल अलग-अलग सोसाइटी और फ्लैटों तक पहुंचने तथा चोरी के बाद मौके से फरार होने के लिए किया जाता था। जांच में कार पर कूटरचित नंबर प्लेट लगी होने की बात भी सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपने काम करने के तरीके के बारे में भी जानकारी दी। गिरोह किसी घर को सीधे निशाना बनाने के बजाय पहले संबंधित सोसाइटी और फ्लैट की रेकी करता था। इस दौरान यह पता लगाया जाता था कि किस घर में लोग मौजूद नहीं हैं और कहां आसानी से चोरी की जा सकती है।
आरोपी रेकी के दौरान अपनी पहचान छिपाने के लिए विशेष सावधानी बरतते थे। पुलिस के मुताबिक, वे सिर पर कैप और चेहरे पर मास्क लगाकर सोसाइटी तथा आसपास के इलाके में घूमते थे। ऐसा कथित तौर पर इसलिए किया जाता था ताकि CCTV कैमरों में चेहरा स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड न हो और बाद में उनकी पहचान करना मुश्किल हो।
रेकी के बाद गिरोह चोरी के लिए उपयुक्त समय का इंतजार करता था। मौका मिलने पर आरोपी ERTIGA कार से संबंधित सोसाइटी या फ्लैट के आसपास पहुंचते थे। इसके बाद घर में घुसकर ज्वैलरी, नकदी, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य कीमती सामान चोरी कर लिया जाता था।
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी कार से मौके से फरार हो जाते थे। कूटरचित नंबर प्लेट का इस्तेमाल कथित तौर पर पुलिस और CCTV निगरानी से बचने के लिए किया जाता था। पुलिस अब बरामद वाहन के वास्तविक रिकॉर्ड और नंबर प्लेट से संबंधित जानकारी की भी जांच कर रही है।
जांच के दौरान आरोपियों के तार केवल नोएडा तक सीमित नहीं पाए गए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों का संबंध नोएडा के अलावा गाजियाबाद और मथुरा में दर्ज कई चोरी के मामलों से भी सामने आया है। संबंधित जिलों की पुलिस से इन मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है।
बरामद ज्वैलरी, इलेक्ट्रॉनिक सामान और नकदी को अलग-अलग मुकदमों से जोड़ने की प्रक्रिया भी चल रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पांच लैपटॉप, दो टैबलेट, छह मोबाइल फोन और बरामद आभूषण किन-किन घरों से चोरी किए गए थे।
पुलिस आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। नोएडा, गाजियाबाद और मथुरा में सामने आए मामलों के अलावा यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने किसी अन्य जिले या थाना क्षेत्र में भी इसी तरीके से चोरी की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं।
गिरोह में महिला आरोपी की मौजूदगी को लेकर भी पुलिस उसकी भूमिका की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि रेकी से लेकर चोरी के सामान को ठिकाने लगाने तक किस आरोपी को कौन सी जिम्मेदारी दी गई थी। आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से उनके संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस अब गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। यह भी जांच की जा रही है कि चोरी का सामान कहां और किसके माध्यम से बेचा जाता था। यदि चोरी का सामान खरीदने या उसे ठिकाने लगाने में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
एडीसीपी नोएडा मनीषा सिंह के मुताबिक, पुलिस ने लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बरामद सामान को संबंधित चोरी के मुकदमों से जोड़ने और गिरोह की अन्य वारदातों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।
फिलहाल थाना सेक्टर-113 पुलिस गिरफ्तार कैलाश उर्फ दिवाकर, इरफान उर्फ इमरान और सोनाली से जुड़े मामलों की विस्तृत जांच कर रही है। लाखों की ज्वैलरी, नकदी और इलेक्ट्रॉनिक सामान की बरामदगी के बाद पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ और तकनीकी जांच के जरिए सोसाइटी तथा फ्लैटों में हुई चोरी की कई अन्य घटनाओं का भी खुलासा हो सकता है।

