Noida Violence Case: भीड़ हिंसा मामले में आरोपी हिमांशु ठाकुर को हाईकोर्ट से सशर्त जमानत, कोर्ट ने कहा- विशिष्ट भूमिका स्पष्ट नहीं
नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के थाना फेज-2 में दर्ज भीड़ हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में आरोपी हिमांशु ठाकुर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने आरोपी की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए उसे सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना उपलब्ध रिकॉर्ड और आरोपी की कथित भूमिका को देखते हुए यह फैसला सुनाया।
मामले में 15 अप्रैल 2026 को एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर के मुताबिक गौतमबुद्ध नगर में कंपनियों और सार्वजनिक स्थानों पर करीब 450 से 500 महिलाओं और पुरुषों की भीड़ ने कथित रूप से पथराव और तोड़फोड़ की थी। इस दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया गया था।
इस मामले में हिमांशु ठाकुर को 17 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वह 19 अप्रैल से जेल में बंद था। आरोपी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि एफआईआर और मामले से संबंधित सामग्री में हिंसा के दौरान उसकी कोई विशिष्ट भूमिका सामने नहीं आई है।
जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान आरोपी के आपराधिक इतिहास का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा गया। बचाव पक्ष की ओर से बताया गया कि हिमांशु ठाकुर के खिलाफ कुल 10 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से सात मामलों में उसे पहले ही जमानत मिल चुकी है, जबकि तीन मामलों में जमानत अर्जियां लंबित हैं।
दूसरी तरफ राज्य सरकार की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने दावा किया कि आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से राज्यभर में हिंसा भड़काने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था और इंटरनेट के जरिए नफरत फैलाने जैसी गतिविधियों में शामिल था।
अदालत ने बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलों को सुनने के साथ मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड का भी अवलोकन किया। कोर्ट ने पाया कि संबंधित भीड़ हिंसा के मामले में आरोपी हिमांशु ठाकुर की कोई विशिष्ट भूमिका स्पष्ट रूप से नहीं बताई गई है।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के गिरीश गांधी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2024) मामले में दिए गए दिशानिर्देशों का भी हवाला दिया।
हाईकोर्ट ने हिमांशु ठाकुर को व्यक्तिगत मुचलका और दो जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करने और अदालत की ओर से निर्धारित शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया गया है।
अदालत का यह आदेश फिलहाल आरोपी को जमानत देने तक सीमित है और इससे मामले के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। भीड़ हिंसा और तोड़फोड़ से संबंधित मूल मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।


