Defence Export Rules: स्वदेशी रक्षा उद्योग के लिए खुला वैश्विक बाजार, निर्यात नियम आसान; OGEL का दायरा लगभग पूरी दुनिया तक बढ़ा

Defence Export Rules: स्वदेशी रक्षा उद्योग के लिए खुला वैश्विक बाजार, निर्यात नियम आसान; OGEL का दायरा लगभग पूरी दुनिया तक बढ़ा

नई दिल्ली। भारत के स्वदेशी रक्षा उद्योग को वैश्विक बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने रक्षा उत्पादों की निर्यात प्रक्रिया को और आसान कर दिया है। रक्षा मंत्रालय ने ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (ओजीईएल) का दायरा पहले के 41 देशों से बढ़ाकर अब लगभग पूरी दुनिया तक कर दिया है। इस फैसले से भारतीय रक्षा कंपनियों, खासकर एमएसएमई को अंतरराष्ट्रीय टेंडर और वैश्विक रक्षा बाजार में तेजी से उतरने का अवसर मिलने की उम्मीद है।

हालांकि निर्यात नियमों में दी गई इस राहत के बावजूद सुरक्षा से जुड़े प्रतिबंध जारी रहेंगे। पाकिस्तान समेत निगेटिव और संवेदनशील देशों के साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पाबंदियों या हथियार प्रतिबंध का सामना कर रहे देशों को ओजीईएल के विस्तारित दायरे से बाहर रखा गया है।

रक्षा मंत्रालय की ओर से निर्यात व्यवस्था में किए गए बदलावों का उद्देश्य प्रक्रिया में होने वाले दोहराव को कम करना और कागजी कार्रवाई का बोझ घटाना है। इससे रक्षा उत्पाद बनाने वाली भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय कारोबारी अवसरों पर अपेक्षाकृत तेजी से निर्णय लेने में मदद मिलने की उम्मीद है।

नई व्यवस्था में गैर-घातक रक्षा उत्पादों के अधिकांश देशों में निर्यात के लिए हितधारक परामर्श की जरूरत नहीं होगी। इससे ऐसे रक्षा उत्पादों के निर्यात की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हो सकता है और कंपनियां विदेशी ग्राहकों की मांग पर तेजी से प्रतिक्रिया दे सकेंगी।

अंतरराष्ट्रीय टेंडर और प्रदर्शनियों में हिस्सा लेने के लिए रक्षा उत्पादों के निर्यात पर भी हितधारक परामर्श की अनिवार्यता हटा दी गई है। इस बदलाव से भारतीय कंपनियों के लिए विदेशों में आयोजित रक्षा प्रदर्शनियों में अपने उत्पाद प्रदर्शित करना और अंतरराष्ट्रीय निविदाओं में भाग लेना आसान होगा।

सरकार ने ओजीईएल की वैधता अवधि में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पहले यह लाइसेंस दो वर्षों के लिए वैध होता था, जिसे अब बढ़ाकर तीन वर्ष कर दिया गया है। इससे कंपनियों को लंबी अवधि तक एक ही लाइसेंस व्यवस्था के तहत निर्यात गतिविधियां संचालित करने की सुविधा मिलेगी।

इसके अलावा तीन अलग-अलग ओजीईएल प्रक्रियाओं को एकीकृत कर एक साझा और सरल ढांचा तैयार किया गया है। नई व्यवस्था से प्रत्येक खेप के लिए बार-बार अलग-अलग अनुमति लेने की जरूरत कम होगी। इसका सीधा फायदा निर्यात प्रक्रिया में लगने वाले समय और प्रशासनिक लागत को कम करने में मिल सकता है।

लंबी अवधि के विदेशी मूल उपकरण निर्माता यानी एफओईएम अनुबंधों के तहत काम करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। इससे वैश्विक रक्षा कंपनियों की आपूर्ति शृंखला का हिस्सा बनने वाली भारतीय कंपनियों को दीर्घकालिक अनुबंधों के तहत उत्पाद और उपकरण भेजने में आसानी होने की उम्मीद है।

नियमों में बदलाव का विशेष लाभ देश के रक्षा एमएसएमई और निजी कंपनियों को मिलने की संभावना है। छोटी और मध्यम कंपनियों के लिए बार-बार मंजूरी की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से कारोबार करने में चुनौती बन सकती थी। ओजीईएल व्यवस्था के विस्तार से ऐसी कंपनियों के लिए वैश्विक टेंडर में भागीदारी और निर्यात के नए अवसर तलाशना आसान हो सकेगा।

भारत में रक्षा उत्पादन और निर्यात में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात कही गई है, जबकि रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये रहा। सरकार अब निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाकर स्वदेशी रक्षा उत्पादों की वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी और बढ़ाने पर जोर दे रही है।

ओजीईएल का दायरा बढ़ाने, इसकी वैधता दो से तीन वर्ष करने और प्रक्रियाओं को एकीकृत करने का उद्देश्य भारतीय रक्षा उद्योग के लिए वैश्विक बाजार तक पहुंच को आसान बनाना है। सरकार का यह कदम स्वदेशी रक्षा विनिर्माण, एमएसएमई की वैश्विक भागीदारी और भारत को एक बड़े रक्षा निर्यातक के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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