Flat Possession: एक माह में अधूरा निर्माण पूरा कर फ्लैट का कब्जा देगा बिल्डर, उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला
नोएडा। निर्धारित समय पर खरीदार को फ्लैट का कब्जा नहीं देना बिल्डर को भारी पड़ा है। जिला उपभोक्ता आयोग ने सोलिटेयर रियल इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में कमी के लिए दोषी ठहराते हुए एक माह के भीतर फ्लैट का अधूरा निर्माण कार्य पूरा कर खरीदार को कब्जा सौंपने का आदेश दिया है। इसके साथ ही बिल्डर को शिकायतकर्ता को दो हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भी देने होंगे।
गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी धीरज सक्सेना ने सोलिटेयर रियल इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड की एक परियोजना में फ्लैट बुक कराया था। फ्लैट की कुल कीमत 21 लाख 2,059 रुपये निर्धारित की गई थी। बुकिंग के समय उन्होंने 8.18 लाख रुपये का भुगतान किया था।
इसके बाद बिल्डर की मांग पर धीरज सक्सेना ने 1,33,128 रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी किया। खरीदार ने शेष राशि देने से पहले कंपनी से पेमेंट प्लान, बिल्डर-बायर एग्रीमेंट और अलॉटमेंट लेटर उपलब्ध कराने की मांग की।
जनवरी 2019 में कंपनी ने उन्हें पेमेंट एग्रीमेंट उपलब्ध कराया। इसके बाद 27 मार्च 2019 को बिल्डर-बायर एग्रीमेंट पर भी हस्ताक्षर किए गए। समझौते के अनुसार खरीदार को वर्ष 2021 में फ्लैट का कब्जा दिया जाना था।
एग्रीमेंट में फ्लैट का कब्जा देने में देरी होने की स्थिति के लिए क्षतिपूर्ति का प्रावधान भी किया गया था। शर्त के अनुसार निर्धारित समय पर कब्जा नहीं मिलने पर खरीदार को पांच रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से क्षतिपूर्ति दी जानी थी।
आरोप है कि निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद बिल्डर ने फ्लैट का निर्माण पूरा कर कब्जा नहीं दिया। दूसरी ओर खरीदार पर लगातार शेष राशि का भुगतान करने का दबाव बनाया जाता रहा। धीरज सक्सेना ने निर्माण की स्थिति और भुगतान से संबंधित जानकारी के लिए कंपनी से कई बार संपर्क किया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
इस बीच धीरज सक्सेना ने दो लाख 25 हजार रुपये का एक और भुगतान कर दिया। इसके बाद भी परियोजना में निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ा और बाद में स्थल पर निर्माण कार्य बंद हो गया। फ्लैट का कब्जा नहीं मिलने और निर्माण कार्य की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर खरीदार ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
आयोग में मामले की सुनवाई के दौरान बिल्डर की ओर से अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले की एकतरफा सुनवाई करते हुए उपलब्ध दस्तावेजों और शिकायतकर्ता की ओर से पेश तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाया।
आयोग ने बिल्डर को आदेश दिया कि वह एक माह के भीतर फ्लैट का बचा हुआ निर्माण कार्य पूरा करे और शिकायतकर्ता को फ्लैट का कब्जा सौंपे। इसके अलावा शिकायतकर्ता को मुकदमे में हुए खर्च के लिए दो हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने का भी आदेश दिया गया है।


