Greater Noida Authority: काम के बढ़ते बोझ से परेशान प्रबंधकों ने मांगी जिम्मेदारियों में कटौती
नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कई प्रबंधक काम के बढ़ते बोझ से परेशान हैं। प्रबंधकों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ कार्मिक को पत्र भेजकर कार्यभार कम करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि एक प्रबंधक को कई विभागों की जिम्मेदारी देने के बजाय प्रत्येक प्रबंधक को एक ही विभाग का काम सौंपा जाए, ताकि विभागीय कार्यों की निगरानी और उनका समयबद्ध निस्तारण बेहतर तरीके से किया जा सके।
प्रबंधकों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में कई अधिकारियों को एक से अधिक विभागों का कार्यभार दिया गया है। इसके कारण उन्हें एक साथ कई विभागों की परियोजनाओं की निगरानी, विभागीय बैठकों, न्यायालय से जुड़े मामलों और जनशिकायतों के निस्तारण की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। कार्यों की संख्या अधिक होने के कारण प्राथमिकताएं तय करने में भी परेशानी आती है।
प्रबंधकों ने एसीईओ कार्मिक से कार्यों का नए सिरे से निर्धारण करने और प्रत्येक प्रबंधक को एक विभाग की जिम्मेदारी देने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि इससे अधिकारी अपने विभाग के कार्यों पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान दे सकेंगे और परियोजनाओं की नियमित निगरानी भी बेहतर हो सकेगी।
दरअसल, यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित कलाधाम सोसाइटी में नलकूप की बोरिंग के लिए खोदे गए पानी से भरे गड्ढे में डूबने से छह वर्षीय बच्चे की मौत के मामले में प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की गई थी। घटना की जांच में बड़ी लापरवाही सामने आई थी।
मामले में वरिष्ठ प्रबंधक जल, प्रबंधक और सहायक प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। वहीं, सुपरवाइजर और तकनीकी सुपरवाइजर को जेल भेजा जा चुका है। उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद इस मामले में सुपरवाइजर, तकनीकी सुपरवाइजर, सहायक प्रबंधक, प्रबंधक और वरिष्ठ प्रबंधक की जिम्मेदारी निर्धारित की गई।
प्राधिकरण के प्रबंधकों का कहना है कि एक साथ कई विभागों की जिम्मेदारी होने से फील्ड में चल रही परियोजनाओं की निगरानी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा विभागीय बैठकों, कोर्ट केस और नागरिकों से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण के लिए भी पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। उनका कहना है कि यदि जिम्मेदारियां स्पष्ट और सीमित होंगी तो अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करना आसान होगा।
प्रबंधकों ने उम्मीद जताई है कि कार्यभार का पुनर्निर्धारण होने से प्राधिकरण की परियोजनाओं की निगरानी, जनशिकायतों के निस्तारण और विभागीय कामकाज में तेजी आएगी। साथ ही अधिकारियों पर काम का दबाव कम होने से कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता में भी सुधार हो सकता है।


