Bihar : “नीतीश बाबू के सपनों को आगे बढ़ा रहे हैं सम्राट चौधरी”- राज कुमार राय

Bihar : जदयू विधायक ने कहा—बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नए दौर की शुरुआत के बावजूद नीतीश कुमार पार्टी की मार्गदर्शक शक्ति बने हुए हैं; विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य में निरंतरता तथा केंद्र से अधिक सहयोग की जरूरत पर दिया जोर

भूमिका

बिहार की राजनीति इस समय हाल के वर्षों के सबसे महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। करीब दो दशकों तक राज्य की राजनीति और शासन व्यवस्था के केंद्र में रहे नीतीश कुमार अब राज्यसभा सदस्य के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हैं, जबकि भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली है। नीतीश कुमार ने 10 अप्रैल 2026 को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली और इसके बाद 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री का पद संभाला।

इस राजनीतिक बदलाव ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। जनता दल (यूनाइटेड) का भविष्य किस दिशा में जाएगा? एनडीए के भीतर शक्ति-संतुलन का नया स्वरूप क्या होगा? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या नीतीश कुमार से जुड़ा विकास और सुशासन का मॉडल बिहार की शासन-व्यवस्था के केंद्र में बना रहेगा?

जदयू के लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। नीतीश कुमार आज भी पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेता और राजनीतिक मार्गदर्शक हैं। लेकिन इसके साथ ही पार्टी के सामने नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे बढ़ाने और भाजपा के मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में अपनी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने की चुनौती भी है।

इन्हीं राजनीतिक परिस्थितियों के बीच टॉप स्टोरी के लिए डॉ. अनिल सिंह, एडिटर, STAR Views & Top Story, ने जदयू के वरिष्ठ नेता और हसनपुर से लगातार तीन बार विधायक चुने गए राज कुमार राय से विशेष बातचीत की।

इस विस्तृत साक्षात्कार में राय ने अपनी राजनीतिक यात्रा, नीतीश कुमार की विरासत, जदयू में नेतृत्व परिवर्तन, नई एनडीए सरकार में पार्टी की भूमिका, बिहार की विशेष राज्य के दर्जे की पुरानी मांग, शराबबंदी तथा शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी।

उनकी बातों का केंद्रीय संदेश स्पष्ट है—बिहार में मुख्यमंत्री भले बदल गए हों, लेकिन नीतीश कुमार का विकास दृष्टिकोण आज भी सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण रोडमैप है और राज कुमार राय के अनुसार, सम्राट चौधरी उसी सोच और सपनों को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

डॉ. अनिल सिंह: आप लगातार तीन बार बिहार विधानसभा के लिए चुने गए हैं और हसनपुर में आपने अपना मजबूत राजनीतिक आधार बनाया है। अपनी चुनावी सफलता का कितना श्रेय आप जनता के बीच किए गए अपने काम को देते हैं और कितना नीतीश कुमार के नेतृत्व तथा उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता को?

राज कुमार राय: कोई भी जनप्रतिनिधि केवल एक कारण के आधार पर लगातार चुनाव नहीं जीत सकता। उसे जनता के बीच निरंतर काम करना पड़ता है, उनकी समस्याओं को समझना पड़ता है और उनके प्रति जवाबदेह रहना पड़ता है। इसके साथ ही पार्टी और उसके नेतृत्व की विश्वसनीयता भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मेरी राजनीतिक यात्रा जमीनी स्तर से शुरू हुई। वर्ष 2001 में मैं मुखिया चुना गया। 2005 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद मैं लगातार उनके साथ काम करता रहा और अपने क्षेत्र की समस्याओं को उनके सामने रखने का प्रयास करता रहा। हसनपुर और समस्तीपुर जिले के कई इलाके उस समय बुनियादी ढांचे के मामले में काफी पिछड़े हुए थे।

विधायक बनने से पहले भी मैंने नीतीश बाबू से आग्रह किया था कि वे मेरे क्षेत्र का दौरा करें, ताकि यहां की विकास संबंधी जरूरतों को स्वयं देख सकें। वर्ष 2008 में वे एक पुल के शिलान्यास कार्यक्रम में आए और उस कार्यक्रम में हजारों लोग शामिल हुए। इसके बाद भी मैं उनकी विभिन्न यात्राओं और विकास अभियानों से जुड़ा रहा।

इसलिए मेरी चुनावी सफलता मेरे क्षेत्र में किए गए काम, हसनपुर की जनता के विश्वास और आशीर्वाद, जदयू के संगठन तथा नीतीश कुमार के नेतृत्व—इन सभी का सम्मिलित परिणाम है।

डॉ. अनिल सिंह: नीतीश कुमार अब पटना की सक्रिय शासन व्यवस्था से निकलकर राज्यसभा सदस्य के रूप में दिल्ली आ गए हैं। लंबे समय तक जदयू का सबसे प्रमुख चेहरा रहने के कारण क्या उनके रोजमर्रा के शासन से हटने के बाद बिहार में पार्टी के भीतर नेतृत्व का कोई खालीपन पैदा हुआ है?

राज कुमार राय: मैं नहीं मानता कि जदयू नेतृत्वविहीन हो गया है। नीतीश कुमार आज भी हमारे सबसे बड़े नेता, अभिभावक और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनके कद और अनुभव का नेता केवल संवैधानिक या संसदीय भूमिका बदल जाने से अप्रासंगिक नहीं हो जाता।

लेकिन यह भी सच है कि प्रत्येक राजनीतिक दल को अपनी अगली पीढ़ी तैयार करनी होती है। नीतीश बाबू ने स्वयं वर्षों के दौरान अनेक नेताओं को तैयार किया और आगे बढ़ाया है। हमारे पास अनुभवी मंत्री, विधायक और संगठन के नेता हैं, जिन्होंने लंबे समय तक उनके मार्गदर्शन में काम किया है।

हम युवा नेतृत्व को भी उभरते हुए देख रहे हैं। निशांत जी को युवा पीढ़ी के एक महत्वपूर्ण चेहरे के रूप में देखा जा रहा है और वे जिम्मेदारियां भी संभाल रहे हैं। नीतीश बाबू हमारे मार्गदर्शक बने रहेंगे, लेकिन पार्टी को ऐसे नेताओं को भी तैयार करना होगा जो भविष्य में उनकी राजनीतिक और विकास की विरासत को आगे बढ़ा सकें।

डॉ. अनिल सिंह: बिहार में अब भाजपा नेता सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार है। क्या जदयू नई सरकार में मिली अपनी भागीदारी और राजनीतिक स्थान से संतुष्ट है, या बदली हुई नेतृत्व व्यवस्था से पार्टी का प्रभाव कम हुआ है?

राज कुमार राय: जदयू को उसकी राजनीतिक ताकत के अनुरूप सरकार में सम्मानजनक भागीदारी मिली है। गठबंधन की राजनीति में सहयोगी दलों के बीच समायोजन और परस्पर सम्मान आवश्यक होता है।

स्वाभाविक रूप से विभागों के बंटवारे में भी कुछ परिवर्तन हुए हैं। पहले जदयू के पास रहे कुछ विभाग भाजपा के पास गए हैं और कुछ जिम्मेदारियों में दूसरी तरफ भी बदलाव हुआ है। जब भी गठबंधन सरकार का पुनर्गठन होता है, इस प्रकार के समायोजन सामान्य बात हैं।

हमारे लिए अधिक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या जदयू को एक महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में सम्मान मिल रहा है और क्या पूरी सरकार मिलकर बिहार के विकास के लिए काम कर रही है। मेरा मानना है कि सरकार में हमारी पार्टी की भागीदारी सार्थक और सम्मानजनक बनी हुई है।

डॉ. अनिल सिंह: विशेष राज्य का दर्जा कभी जदयू की सबसे प्रमुख राजनीतिक मांगों में शामिल था और नीतीश कुमार ने इसे बार-बार केंद्र सरकार के सामने उठाया। अब जबकि जदयू एनडीए का हिस्सा है, क्या यह मांग पीछे छूट गई है या आज भी उतनी ही प्रासंगिक है?

राज कुमार राय: यह मांग आज भी प्रासंगिक है, क्योंकि इसका आधार बिहार की विकास संबंधी आवश्यकताएं थीं। जदयू ने लगातार इस मुद्दे को उठाया। हमने अधिकार रैली सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए और दिल्ली तक अपनी मांग पहुंचाई।

बिहार ने निश्चित रूप से काफी प्रगति की है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि राज्य ने ऐतिहासिक रूप से एक पिछड़ी हुई स्थिति से अपनी विकास यात्रा शुरू की थी। आज भी कई क्षेत्रों में बड़े निवेश, बेहतर बुनियादी ढांचे, उद्योगों और रोजगार के अवसरों की आवश्यकता है।

गठबंधन में साथ काम करते समय राजनीतिक परिस्थितियां किसी मांग को उठाने के तरीके और समय को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन बिहार को अतिरिक्त केंद्रीय सहायता की जरूरत आज भी बनी हुई है। यह सहायता विशेष राज्य के दर्जे के रूप में मिले, विशेष आर्थिक पैकेज के रूप में मिले या किसी अन्य प्रभावी व्यवस्था के माध्यम से—बिहार के विकास की गति तेज करने के लिए केंद्र से अधिक सहयोग आवश्यक है।

डॉ. अनिल सिंह: नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक पहचान सुशासन और विकास के इर्द-गिर्द बनाई। सम्राट चौधरी की राजनीतिक शैली और व्यक्तित्व उनसे अलग है। क्या आपको विश्वास है कि नए मुख्यमंत्री नीतीश युग में स्थापित विकास की गति को बनाए रख पाएंगे?

राज कुमार राय: नीतीश कुमार ने अपने लंबे कार्यकाल में बिहार में व्यापक परिवर्तन किए और विकास का एक बहुत ऊंचा मानदंड स्थापित किया। सड़क, पुल, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में हुए सुधार पूरे राज्य में दिखाई देते हैं।

हर नेता की अपनी कार्यशैली होती है। इसलिए यह अपेक्षा करना उचित नहीं होगा कि सम्राट चौधरी बिल्कुल नीतीश कुमार की तरह ही काम करें। असली सवाल यह है कि बिहार की विकास यात्रा जारी रहती है या नहीं।

अब तक हमने जो देखा है, उसमें वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश बाबू के समय शुरू की गई अनेक योजनाओं, नीतियों और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ा रहे हैं और साथ ही नई पहल भी कर रहे हैं।

नीतीश कुमार ने बिहार में विकास की एक बहुत लंबी लकीर खींची है। वर्तमान सरकार की जिम्मेदारी उस लकीर को मिटाने की नहीं, बल्कि उसे और आगे बढ़ाने की होनी चाहिए। मेरा मानना है कि सम्राट चौधरी नीतीश बाबू के सपनों और उनके विकास के विजन को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

डॉ. अनिल सिंह: शराबबंदी नीतीश कुमार के सबसे महत्वपूर्ण और साथ ही सबसे अधिक बहस वाले फैसलों में से एक रही है। क्या नई सरकार में भी यह नीति पूरी तरह जारी रहेगी या भविष्य में इसकी समीक्षा की संभावना देखते हैं?

राज कुमार राय: वर्तमान में बिहार में शराबबंदी लागू है और इसे वापस लेने का कोई निर्णय नहीं हुआ है। यह नीति एक विशेष सामाजिक उद्देश्य के साथ लागू की गई थी और अब इसे लागू हुए कई वर्ष हो चुके हैं।

किसी भी बड़ी नीति की तरह इसके क्रियान्वयन की समीक्षा की जा सकती है, ताकि कमियों को दूर किया जाए और व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। लेकिन नीति के क्रियान्वयन में सुधार करना और नीति को समाप्त करना—दोनों अलग बातें हैं।

आज की स्थिति में शराबबंदी लागू है और हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि सरकार इसे समाप्त करने पर विचार कर रही है।

डॉ. अनिल सिंह: शिक्षा और बेरोजगारी बिहार की बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। पिछले दो दशकों में प्रगति के बावजूद युवाओं को अभी भी अधिक अवसरों की अपेक्षा है। वास्तव में क्या बदलाव आया है और नई सरकार की प्राथमिकताएं क्या होनी चाहिए?

राज कुमार राय: यदि हम 2005 से पहले के बिहार की शिक्षा व्यवस्था की तुलना आज की स्थिति से करें तो बदलाव बहुत बड़ा है। पहले ग्रामीण इलाकों में शैक्षणिक ढांचा काफी सीमित था। आज माध्यमिक और प्लस-टू शिक्षा का काफी विस्तार हुआ है। पंचायत स्तर तक इसकी पहुंच बढ़ी है और उच्च शिक्षा की सुविधाएं भी ऐसे क्षेत्रों तक पहुंची हैं, जहां पहले उपलब्ध नहीं थीं।

सरकारी स्कूलों का बुनियादी ढांचा भी काफी बेहतर हुआ है। भवन, डेस्क, पेयजल, शौचालय, बिजली और शिक्षकों की उपलब्धता पहले की तुलना में बेहतर हुई है।

लेकिन शायद सबसे महत्वपूर्ण बदलाव सामाजिक स्तर पर आया है। जिन परिवारों की पिछली पीढ़ियों को औपचारिक शिक्षा तक बहुत कम या बिल्कुल पहुंच नहीं थी, आज उन्हीं परिवारों के बच्चे मैट्रिक और इंटरमीडिएट पास कर रहे हैं और स्नातक तथा स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। सामान्य ग्रामीण परिवारों के युवा शिक्षक, पुलिस अधिकारी, इंजीनियर और अन्य पेशेवर बन रहे हैं।

लेकिन अब अगले चरण में हमारा ध्यान शिक्षा की गुणवत्ता और रोजगार पर होना चाहिए। शिक्षा को कौशल, तकनीक, उद्योग और रोजगार सृजन से जोड़ना होगा। बिहार के युवाओं को अच्छी नौकरियों के लिए मजबूरी में राज्य से बाहर न जाना पड़े, बल्कि उन्हें बिहार के भीतर ही अधिक से अधिक अवसर मिलें—यह हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

डॉ. अनिल सिंह: स्वास्थ्य सेवाएं भी बिहार की एक महत्वपूर्ण चुनौती हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। ब्लॉक, अनुमंडल और जिला स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में कितना सुधार हुआ है और अभी क्या किए जाने की आवश्यकता है?

राज कुमार राय: स्वास्थ्य व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है, हालांकि इसे और मजबूत करने की आवश्यकता है।

पहले कई ब्लॉक स्तरीय अस्पतालों में अच्छे भवन, डॉक्टर, दवाइयां और बुनियादी सुविधाएं तक पर्याप्त नहीं थीं। इसी कारण लोग सरकारी अस्पतालों में जाने से बचते थे। आज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और ब्लॉक, अनुमंडल तथा जिला स्तर के अस्पतालों की स्थिति बेहतर हुई है। डॉक्टरों, दवाइयों और उपचार की सुविधाएं पहले की तुलना में काफी बेहतर हैं।

अब हमारा लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं का विकेंद्रीकरण होना चाहिए। जिस बीमारी का इलाज ब्लॉक, अनुमंडल या जिला स्तर पर संभव है, उसके लिए मरीज को पटना जाने की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए।

केवल अत्यधिक विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता वाले मरीजों—जैसे गंभीर हृदय, किडनी या लीवर संबंधी बीमारियों—को ही बड़े अस्पतालों में रेफर करने की जरूरत होनी चाहिए। यदि जिला और स्थानीय स्तर के अस्पताल अधिक मजबूत होंगे तो इससे सामान्य परिवारों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा और उन्हें इलाज के लिए होने वाली परेशानियों से भी राहत मिलेगी।

डॉ. अनिल सिंह: अंतिम सवाल—बिहार में अब भाजपा का मुख्यमंत्री है, जबकि जदयू की राजनीति में नीतीश कुमार की राजनीतिक और विकास संबंधी विरासत आज भी केंद्रीय स्थान रखती है। क्या आपको वास्तव में विश्वास है कि सम्राट चौधरी की सरकार नीतीश कुमार के विजन को आगे बढ़ाएगी, न कि धीरे-धीरे उसकी जगह पूरी तरह अलग राजनीतिक एजेंडा ले लेगा?

राज कुमार राय: जब राजनीतिक दल एनडीए के अंतर्गत साथ आते हैं और सरकार बनाते हैं, तो वे जनता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं। विकास को गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच प्रतिस्पर्धा का विषय नहीं बनना चाहिए।

जदयू के लिए नीतीश कुमार आज भी हमारी मार्गदर्शक शक्ति हैं। हमारे विधायक, मंत्री और पार्टी कार्यकर्ता उनके द्वारा स्थापित विकास दृष्टिकोण को सुरक्षित रखने और आगे बढ़ाने के लिए काम करते रहेंगे।

इसके साथ ही हमने अब तक जो देखा है, उसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी नीतीश बाबू से जुड़ी अनेक योजनाओं और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ा रहे हैं। राजनीतिक कार्यशैली अलग हो सकती है, लेकिन बिहार का विकास हमारा साझा उद्देश्य होना चाहिए।

हमारी अपेक्षा बिल्कुल स्पष्ट है—जो अच्छा और सफल रहा है, उसे बनाए रखा जाए; जहां सुधार की जरूरत है, वहां सुधार किया जाए और जहां नई पहल आवश्यक है, वहां नए कदम उठाए जाएं। अंततः बिहार और बिहार की जनता का हित सर्वोपरि होना चाहिए।

निष्कर्ष

राज कुमार राय की बातचीत बिहार की वर्तमान राजनीति में निरंतरता और परिवर्तन के बीच बन रहे संतुलन को सामने लाती है। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री कार्यालय से संसद पहुंच चुके हैं और सम्राट चौधरी बिहार सरकार का नेतृत्व संभाल रहे हैं। लेकिन यह सत्ता परिवर्तन किसी गठबंधन परिवर्तन के कारण नहीं, बल्कि एनडीए के भीतर नेतृत्व परिवर्तन के रूप में हुआ है। इसलिए शासन और विकास की निरंतरता नई राजनीतिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है।

जदयू के लिए नीतीश कुमार केवल पूर्व मुख्यमंत्री नहीं हैं। वे आज भी उस राजनीतिक और विकास मॉडल के प्रतिनिधि हैं, जिसके आधार पर पार्टी ने अपनी पहचान बनाई है। हालांकि राय यह भी स्वीकार करते हैं कि बिहार की राजनीति हमेशा किसी एक व्यक्तित्व पर निर्भर नहीं रह सकती। नई पीढ़ी को जिम्मेदारी संभालनी होगी और जदयू को उस गठबंधन व्यवस्था में अपनी भूमिका को नए सिरे से मजबूत करना होगा, जिसमें अब मुख्यमंत्री की कुर्सी भाजपा के पास है।

लेकिन बिहार के सामने असली चुनौती व्यक्तियों या दलों से कहीं बड़ी है। राज्य को अब बुनियादी विकास के चरण से आगे बढ़कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार सृजन, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, औद्योगिकीकरण, निवेश और पलायन कम करने वाले अवसरों की दिशा में निर्णायक कदम उठाने होंगे।

राज कुमार राय का राजनीतिक संदेश इसलिए एनडीए के भीतर टकराव के बजाय निरंतरता और समन्वय का है। उनके अनुसार, जदयू के लिए नीतीश कुमार मार्गदर्शक शक्ति बने हुए हैं, जबकि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने बिहार को विकास के अगले चरण तक पहुंचाने की जिम्मेदारी है।

राय के आकलन में नई सरकार नीतीश बाबू की विरासत को पीछे छोड़ने के बजाय उनके सपनों को आगे बढ़ाते हुए बिहार की विकास यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ने की कोशिश कर रही है।

टॉप स्टोरी के लिए विशेष साक्षात्कार
साक्षात्कार: डॉ. अनिल सिंह
एडिटर, STAR Views & Top Story

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