New Delhi : भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर दी। 65 सदस्यीय इस टीम में अनुभव और ऊर्जा का नया संतुलन दिखता है। टीम में 12 महिलाएं हैं जो कुल का 18 प्रतिशत हैं। 14 नेताओं को पुरानी जिम्मेदारी फिर सौंपी गई है जबकि 51 चेहरे नए हैं। 73 वर्षीय वसुंधरा राजे सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं और 35 वर्षीय डॉक्टर हेमांग जोशी सबसे युवा। क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व में भी बदलाव साफ है। अगले साल चुनाव वाले राज्यों को विशेष तवज्जो मिली है। उत्तर प्रदेश से 8, उत्तराखंड से 4, गुजरात से 4 और पंजाब से 2 नेता शामिल किए गए हैं। कुल मिलाकर 18 चेहरे इन्हीं चार राज्यों से आए हैं।
इस घोषणा के साथ ही पार्टी ने पिछली टीम के 29 प्रमुख चेहरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे केंद्रीय पदों पर रहे नेता भी शामिल हैं। मोर्चा, कार्यालय और मीडिया से जुड़े कई पुराने पदाधिकारी भी इस बार जगह नहीं बना सके। लंबे समय बाद संगठन में इतना बड़ा बदलाव हुआ है और इसे सीधे तौर पर प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन से जोड़कर देखा जा रहा है।
पार्टी का संदेश स्पष्ट है। अब संगठन में उसी को स्थान मिलेगा जो जमीन पर सक्रिय है, जिसका कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क है और जो चुनावी मैदान में नतीजा दे सकता है। पद के नाम पर निष्क्रिय रहने वालों के लिए दरवाजे बंद कर दिए गए हैं।
इस पूरी सर्जरी के पीछे संगठन महासचिव सुनील बंसल की रणनीति सबसे निर्णायक मानी जा रही है। बंसल को संगठन का कुशल शिल्पकार कहा जाता है। बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठन खड़ा करने में उनकी भूमिका हमेशा से अलग रही है। उन्होंने पिछले एक दशक में कई राज्यों के संगठनात्मक ढांचे को बदला और चुनावी जीत में बड़ी भूमिका निभाई।
सुनील बंसल का अपना राजनीतिक सफर भी इसी मेहनत की कहानी कहता है। राजस्थान के निवासी बंसल ने 1989 में राजस्थान विश्वविद्यालय के महासचिव का चुनाव जीता था। इसके बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और 1990 में प्रचारक बने। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले संघ ने उन्हें भाजपा में भेजा और उत्तर प्रदेश का सह संगठन मंत्री बनाया। उस समय अमित शाह यूपी के प्रभारी महासचिव थे।
2014 की प्रचंड जीत के बाद बंसल को यूपी का संगठन मंत्री बनाया गया। 2017, 2019 और 2022 में उत्तर प्रदेश में भाजपा की लगातार जीत में उनका योगदान अहम रहा। आठ साल तक यूपी में संगठन मंत्री रहने के बाद 2022 में योगी सरकार की वापसी के बाद उन्हें दिल्ली बुलाया गया। जेपी नड्डा की टीम में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी मिली और साथ ही ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल का प्रभार भी सौंपा गया।
2024 के लोकसभा चुनाव में बंसल के मार्गदर्शन में भाजपा ने ओडिशा की 21 में से 20 सीटें जीतीं और राज्य में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। नवीन पटनायक के लंबे शासन को समाप्त करने में बंसल की रणनीति को बड़ी वजह माना गया। 2026 के पश्चिम बंगाल चुनाव में भी उन्होंने पूरी ताकत झोंकी और पार्टी पहली बार वहां पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई।
इन्हीं अनुभवों के आधार पर बंसल ने नई टीम के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि कुछ नेता संगठनात्मक काम से कट गए हैं और केवल पद की आड़ में सक्रिय हैं। ऐसे में अब पुरानी लकीर छोड़कर नए, ऊर्जावान और जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे लाना जरूरी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर 29 चेहरों को ड्रॉप करने और सभी मोर्चों के अध्यक्ष बदलने का फैसला लिया गया। युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा समेत सभी मोर्चों में नए नेतृत्व की तैयारी है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह बदलाव सिर्फ फेरबदल नहीं है। यह पार्टी को चुनावी मोड में ले जाने की तैयारी है। नई टीम में नई सोच, नई कार्यशैली और नए प्रयोगों की गुंजाइश है। इससे कार्यकर्ताओं में भी संदेश गया है कि मेहनत और नतीजे देने वालों को ही आगे मौका मिलेगा।
कुल मिलाकर नितिन नवीन की अध्यक्षता में बनी 65 सदस्यीय टीम और सुनील बंसल की रणनीति मिलकर पार्टी को अगले चुनावों के लिए तैयार कर रही हैं। 29 पुराने चेहरों का बाहर होना दर्द जरूर देगा, लेकिन संगठन के हित में यह कठोर निर्णय जरूरी था। अब देखना होगा कि यह नई टीम संगठन को जमीन पर कितना मजबूत करती है और मतदाताओं तक पार्टी का संदेश कितनी मजबूती से पहुंचाती है।



