Mathura : राष्ट्रगीत वंदे मातरम पर हुए विवाद, संसद में साधु के वेश को लेकर हुए ड्रामे और देश विरोधी विचारधारा को लेकर साध्वी ऋतंभरा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अक्षम्य है और समाज के धैर्य की परीक्षा नहीं ली जानी चाहिए।
वंदे मातरम पर असहज होने वालों पर निशाना साधते हुए साध्वी ने कहा कि राष्ट्रगीत के दौरान जिन लोगों की बॉडी लैंग्वेज बदली, उनका असली चेहरा देश के सामने आ गया है। झूठ और नाटक ज्यादा दिन नहीं चलते। उन्होंने राष्ट्र की तुलना विशाल वटवृक्ष से करते हुए कहा कि यदि वृक्ष में दीमक लग जाए तो दीमक का इलाज किया जाता है, पूरे वृक्ष को उखाड़कर नहीं फेंका जाता।
संसद में सांसद पप्पू यादव द्वारा साधु का चोला पहनने की घटना को साध्वी ने ड्रामा बताया। उन्होंने कहा कि भगवा वस्त्र त्याग, तपस्या और बलिदान का प्रतीक है। इसका अपमान भगवान श्रीराम का अपमान है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सहन करने की भी एक सीमा होती है। ज्यादा रगड़ोगे तो चंदन में भी आग पैदा हो जाती है।
साध्वी ने राम मंदिर और आस्था के केंद्रों के खिलाफ चढ़ावे को लेकर चल रहे दुष्प्रचार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि धर्म और नैतिक शिक्षा के अभाव में समाज का चरित्र गिर रहा है। लोगों में अश्रद्धा फैलाने के लिए सुनियोजित तरीके से प्रचार किया जा रहा है। ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री के बयान का जिक्र करते हुए साध्वी ने कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद के बाद अब मानसिक या वैचारिक नक्सलवाद को समाप्त करना होगा। विद्यार्थियों का अधिकारों के लिए आवाज उठाना लोकतंत्र की खूबसूरती है, लेकिन संसद में घुसना, लोकतंत्र के मंदिर को नुकसान पहुंचाना और देश विरोधी बातें करना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि युवाओं को देश विरोधी सोच का शिकार होने से बचाना आवश्यक है।


