Noida News: जेवर में पति से कहासुनी के बाद महिला ने खाया सल्फास, इलाज के दौरान मौत, पुलिस जांच में जुटी
नोएडा। ग्रेटर नोएडा के जेवर थाना क्षेत्र के थोरा गांव में घरेलू विवाद के बाद 28 वर्षीय महिला की जहरीला पदार्थ (सल्फास) खाने से मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बारिश के दौरान घर की टपकती छत को लेकर पति-पत्नी के बीच कहासुनी हुई थी। विवाद के कुछ समय बाद महिला ने घर में रखा सल्फास खा लिया। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान पिंकी देवी के रूप में हुई है। उनकी शादी करीब 10 वर्ष पहले जौनी से हुई थी। दंपती के दो छोटे बच्चे हैं। परिजनों ने पुलिस को बताया कि घर की छत काफी समय से टपक रही थी और लगातार हो रही बारिश के कारण परेशानी और बढ़ गई थी। इसी वजह से परिवार में तनाव बना हुआ था।
बताया जा रहा है कि बुधवार रात परिवार के अन्य सदस्य किसी काम से घर से बाहर गए हुए थे। इसी दौरान तेज बारिश शुरू हो गई और घर की छत से पानी टपकने लगा। पिंकी देवी ने पति से बाहर से खाना लाने की बात कही और घर में खाना बनाने से इनकार कर दिया। इसी मुद्दे पर दोनों के बीच कहासुनी हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया।
पुलिस के मुताबिक विवाद के बाद पिंकी देवी ने घर में रखा सल्फास खा लिया। कुछ देर बाद जब परिवार के अन्य सदस्य घर लौटे तो वह कमरे में अचेत अवस्था में मिलीं। उनके मुंह से झाग निकल रहा था। परिजन तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही जेवर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक साक्ष्य जुटाए। मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।
जेवर थाना प्रभारी अजय कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल पुलिस को इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। यदि परिजनों की ओर से शिकायत मिलती है तो उसके आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि घरेलू विवाद की स्थिति में जल्दबाजी में कोई गंभीर कदम न उठाएं और आवश्यकता पड़ने पर परिवार, समाज या संबंधित सहायता सेवाओं का सहयोग लें।



