Jewar Land Fraud: फर्जी हस्ताक्षर कर फर्म का कराया विलय, करोड़ों की जमीन हड़पने के आरोप में पांच पर केस दर्ज

Jewar Land Fraud: फर्जी हस्ताक्षर कर फर्म का कराया विलय, करोड़ों की जमीन हड़पने के आरोप में पांच पर केस दर्ज
ग्रेटर नोएडा। जेवर थाना क्षेत्र में फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए फर्म का विलय कर औद्योगिक भूखंड हड़पने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी समेत विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दयानतपुर गांव निवासी गौरव सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी आरएस ट्रेडर्स नामक फर्म को वर्ष 2023 में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की ओर से एक औद्योगिक भूखंड आवंटित किया गया था। कुछ समय बाद उन्हें प्राधिकरण से सूचना मिली कि लीज डीड होने के बावजूद फर्म की ओर से आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किए गए और न ही परियोजना से संबंधित गतिविधियां शुरू की गईं।
इस सूचना के बाद जब उन्होंने मामले की जांच की तो कथित तौर पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। पीड़ित का आरोप है कि उनके फर्जी हस्ताक्षर कर उनकी फर्म का विलय हिमराव स्टील प्रोडक्ट लिमिटेड में करा दिया गया। इतना ही नहीं, पहले उन्हें और उनकी पत्नी को कंपनी में निदेशक (डायरेक्टर) के रूप में दर्शाया गया और बाद में कथित रूप से उनके नाम से इस्तीफा दिखाकर अन्य लोगों को निदेशक बना दिया गया।
पीड़ित का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से उनकी फर्म और उससे जुड़े औद्योगिक भूखंड पर अवैध कब्जा करने की साजिश रची गई। मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली, जिसके बाद अदालत ने पुलिस को मुकदमा दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए।
न्यायालय के आदेश पर जेवर थाना पुलिस ने मोनिका चौधरी, रोबिन सिंह, अमित पवार, करन कोहली और साहिल कोहली के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
जेवर थाना प्रभारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच की जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अब फर्म के दस्तावेज, कंपनी रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड, हस्ताक्षरों की सत्यता और प्राधिकरण में जमा किए गए अभिलेखों की भी जांच करेगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि कथित फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई।





