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Bihar : औरंगाबाद में तमसी मोड़ पर स्कूली वैन 15 फीट गहरी नहर में पलटी, 14 बच्चे घायल

Aurangabad (मृत्युंजय) : बिहार के औरंगाबाद से एक दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। स्कूल जा रहे मासूम बच्चों से भरी एक वैन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे सूखी नहर में पलट गई। हादसे में 14 बच्चे घायल हुए हैं, जिनमें तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोगों ने तुरंत रेस्क्यू शुरू कर बच्चों की जान बचाई।

कुटुंबा थाना क्षेत्र स्थित तमसी मोड़ के पास बुधवार सुबह सेंट जेवियर स्कूल की मैजिक वैन हादसे का शिकार हो गई। महुआधाम, मिर्जापुर, कुटुंबा और लखना समेत कई गांवों से बच्चों को लेकर स्कूल जा रही वैन बसडीहा नहर के समीप अचानक अनियंत्रित हो गई और करीब 15 फीट गहरी सूखी नहर में पलट गई। हादसे के बाद बच्चों की चीख-पुकार से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बिना देर किए राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों ने ऑटो और अन्य वाहनों की मदद से सभी घायल बच्चों को नहर से बाहर निकालकर कुटुंबा रेफरल अस्पताल पहुंचाया। ग्रामीणों की तत्परता से सभी बच्चों को समय पर इलाज मिल सका।

हादसे में कुल 14 बच्चे घायल हुए हैं। इनमें आरवी प्रताप, मौली कुमारी और हर्ष कुमार की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्राथमिक उपचार के बाद तीनों को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया है, जबकि अन्य बच्चों का इलाज जारी है।

हादसे की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक अस्पताल पहुंच गए। बच्चों की हालत देखकर परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन क्षमता से अधिक बच्चों को वैन में बैठाकर उनकी जान जोखिम में डाल रहा था। उन्होंने इस पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

इधर, सूचना मिलते ही कुटुंबा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी। शुरुआती जांच में ओवरलोडिंग और चालक के वाहन पर नियंत्रण खोने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। इस घटना ने एक बार फिर निजी स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था और ओवरलोडिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल सभी घायलों का इलाज जारी है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर तय नियमों का पालन कब सुनिश्चित होगा और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई कब होगी।

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