Navy Focus: थाईलैंड दौरा पूरा कर दक्षिण-पूर्व एशिया मिशन पर आगे बढ़े भारतीय युद्धपोत

Navy Focus: थाईलैंड दौरा पूरा कर दक्षिण-पूर्व एशिया मिशन पर आगे बढ़े भारतीय युद्धपोत

नई दिल्ली, 30 जून। भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति ने थाईलैंड के सत्ताहिप बंदरगाह पर अपनी सफल पोर्ट कॉल पूरी करने के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में अगले मिशन के लिए प्रस्थान कर दिया है। 29 जून 2026 को इन युद्धपोतों के रवाना होने के साथ ही भारत और थाईलैंड के बीच समुद्री सहयोग को नई मजबूती मिली है। यह तैनाती हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सामूहिक समुद्री सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

रियर एडमिरल आलोक आनंद के नेतृत्व में पूर्वी बेड़े की इस यात्रा के दौरान भारतीय नौसेना और रॉयल थाई नेवी के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कई महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन किया गया। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, द्विपक्षीय नौसैनिक सहयोग, संयुक्त अभियानों की क्षमता बढ़ाने और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। अधिकारियों ने भविष्य में संयुक्त अभ्यास और तकनीकी सहयोग को भी और मजबूत करने पर सहमति जताई।

सत्ताहिप बंदरगाह पर भारतीय और थाई नौसेनाओं के बीच पेशेवर आदान-प्रदान कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान परिचालन गतिविधियों, सामरिक अनुभवों के आदान-प्रदान और विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच आपसी विश्वास और समन्वय को बढ़ावा मिला। ऐसे कार्यक्रम भविष्य में संयुक्त समुद्री अभियानों के दौरान बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

दौरे के दौरान आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस कवरत्ती पर विशेष स्वागत समारोह का भी आयोजन किया गया। इसमें थाईलैंड में भारत के राजदूत, रॉयल थाई नेवी के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न देशों के राजनयिक और भारतीय समुदाय के प्रमुख सदस्य शामिल हुए। इस अवसर पर भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे मित्रतापूर्ण संबंधों और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।

भारतीय नौसेना ने कहा कि यह तैनाती भारत के ‘महासागर’ (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) दृष्टिकोण के अनुरूप है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना, मित्र देशों के साथ साझेदारी को मजबूत करना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित एवं मुक्त समुद्री परिवेश सुनिश्चित करना है।

भारतीय नौसेना लगातार मित्र देशों के साथ संयुक्त अभ्यास, पोर्ट कॉल और समुद्री सहयोग कार्यक्रमों के माध्यम से क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। दक्षिण-पूर्व एशिया की यह तैनाती भी उसी रणनीति का हिस्सा है, जिससे भारत की समुद्री उपस्थिति मजबूत होगी और क्षेत्रीय साझेदार देशों के साथ रक्षा संबंधों को नई गति मिलेगी।

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