Labour Violence Case: रिचा ग्लोबल कंपनी हिंसा मामले में दो आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज, अदालत ने बताई सक्रिय भूमिका

Labour Violence Case: रिचा ग्लोबल कंपनी हिंसा मामले में दो आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज, अदालत ने बताई सक्रिय भूमिका
नोएडा की चर्चित रिचा ग्लोबल कंपनी श्रमिक हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ मामले में अदालत ने दो आरोपियों रूद्रप्रताप और छोटू को बड़ा झटका देते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर माना कि दोनों आरोपियों की घटना में प्रथम दृष्टया सक्रिय भूमिका दिखाई देती है, इसलिए उन्हें जमानत दिए जाने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता।
अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना फेज-2 क्षेत्र स्थित रिचा ग्लोबल कंपनी में अप्रैल 2026 के दौरान वेतन वृद्धि की मांग को लेकर कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। आरोप है कि 10 अप्रैल से 13 अप्रैल के बीच सैकड़ों कर्मचारियों ने कंपनी के मुख्य गेटों का घेराव किया, अंदर मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों को बंधक बनाया तथा काम पर आने वाले अन्य कर्मचारियों को कंपनी परिसर में प्रवेश करने से रोका।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने तोड़फोड़, हिंसा और आगजनी की घटनाओं को अंजाम देने की योजना बनाई थी। पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि कुछ मोबाइल नंबरों के जरिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर कर्मचारियों को उकसाया गया और आंदोलन को हिंसक रूप देने की साजिश रची गई।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि रूद्रप्रताप और छोटू को झूठा फंसाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी मामले में आरोपी अनिल, रितेश, मुकेश और सतेंद्र को पहले ही जमानत मिल चुकी है। बचाव पक्ष का यह भी तर्क था कि दोनों आरोपियों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उन्हें राहत दी जानी चाहिए।
हालांकि अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत के समक्ष कई महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत किए। अभियोजन के अनुसार छोटू के मोबाइल फोन से ऐसे वीडियो बरामद हुए हैं जिनमें वह प्रदर्शनकारी भीड़ के बीच सक्रिय रूप से मौजूद दिखाई देता है। इसके अलावा व्हाट्सएप संदेशों में पेट्रोल बम तैयार करने के लिए बोतलें एकत्र करने जैसी चर्चाएं भी सामने आई हैं।
अभियोजन ने यह भी बताया कि मामले के गवाह राजेश कुमार, शैलेन्द्र और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों ने दोनों आरोपियों की घटनास्थल पर मौजूदगी की पुष्टि की है। गवाहों के अनुसार दोनों आरोपी भीड़ को उकसाने और प्रदर्शन को आक्रामक बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया दोनों आरोपियों की घटना में सक्रिय संलिप्तता दिखाई देती है। न्यायालय ने माना कि इस स्तर पर उन्हें जमानत देना उचित नहीं होगा।
इसी आधार पर अदालत ने रूद्रप्रताप और छोटू की जमानत याचिका खारिज कर दी। मामले की सुनवाई और जांच की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। यह मामला अप्रैल 2026 में हुए श्रमिक प्रदर्शन, हिंसा और आगजनी की घटनाओं के कारण नोएडा में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।

