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Noida Police Action: नोएडा में नशीली दवाओं के बड़े गिरोह का भंडाफोड़, 7.25 लाख रुपये की अवैध कफ सिरप बरामद; दो तस्कर गिरफ्तार

Noida Police Action: नोएडा में नशीली दवाओं के बड़े गिरोह का भंडाफोड़, 7.25 लाख रुपये की अवैध कफ सिरप बरामद; दो तस्कर गिरफ्तार

 

नोएडा। सेक्टर-20 थाना पुलिस और यातायात पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नशीली दवाओं की तस्करी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। पुलिस ने फिल्म सिटी के पास से दो आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से करीब 7.25 लाख रुपये मूल्य की 3,600 शीशी अवैध कफ सिरप बरामद की है। यह खेप एक फॉर्च्यूनर कार में भरकर नोएडा लाई जा रही थी। पुलिस का दावा है कि बरामद कफ सिरप का इस्तेमाल नशे के रूप में किया जाता है। मामले में तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है।

 

एसीपी प्रवीण सिंह ने बताया कि शनिवार को सेक्टर-20 थाना पुलिस और यातायात पुलिस नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर विशेष जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान फिल्म सिटी से रजनीगंधा चौक की ओर जाने वाले मार्ग पर एक्सप्रेसवे से उतरने वाले लूप के पास एक संदिग्ध फॉर्च्यूनर कार को रोककर उसकी तलाशी ली गई। जांच के दौरान कार में रखे 15 बोरों से भारी मात्रा में अवैध कफ सिरप बरामद हुआ।

 

पुलिस के अनुसार बरामद कफ सिरप ओनेरेक्स 100 एमएल ब्रांड का है। कुल 3,600 शीशियां बरामद की गई हैं। जांच में पता चला कि सिरप की प्रत्येक पांच मिलीलीटर मात्रा में 10 मिलीग्राम कोडीन फॉस्फेट मौजूद है। कोडीन युक्त दवाओं का उपयोग सामान्य रूप से चिकित्सकीय सलाह पर खांसी के इलाज के लिए किया जाता है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा लेने पर नशे जैसा प्रभाव उत्पन्न होता है। इसी वजह से इस तरह की दवाओं की अवैध तस्करी कर उन्हें नशे के रूप में बेचने का कारोबार लगातार बढ़ रहा है।

 

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 25 वर्षीय पीयूष वर्मा और 20 वर्षीय कपिल विश्वकर्मा के रूप में हुई है। पीयूष वर्मा मध्य प्रदेश के रीवा जिले का निवासी है, जबकि कपिल विश्वकर्मा भी रीवा जिले के चौराहटा थाना क्षेत्र के ग्राम तमरा का रहने वाला है। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि वे नशीली कफ सिरप की खेप को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम करते थे।

 

पुलिस जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि इस अवैध कारोबार के पीछे एक अंतरराज्यीय नेटवर्क सक्रिय है, जो युवाओं तक नशीले पदार्थ और प्रतिबंधित दवाएं पहुंचाने का काम करता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और इसके मुख्य संचालकों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

 

जांच के दौरान तीन अन्य संदिग्धों के नाम भी सामने आए हैं। इनमें विष्णु कुशवाहा, शानू सिंह और हीरा लाल शामिल हैं। पुलिस के अनुसार विष्णु कुशवाहा और शानू सिंह मध्य प्रदेश के निवासी हैं, जबकि हीरा लाल को इस खेप का मुख्य विक्रेता बताया जा रहा है। तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।

 

पुलिस ने बरामद कफ सिरप की अनुमानित कीमत करीब 7 लाख 25 हजार रुपये बताई है। इस मामले में सेक्टर-20 थाने में एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

 

एडिशनल डीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि नशीले पदार्थों और प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है। पुलिस ऐसे मामलों पर विशेष निगरानी रख रही है ताकि युवाओं को नशे के जाल से बचाया जा सके।

 

गौरतलब है कि कोडीन फॉस्फेट युक्त कफ सिरप का इस्तेमाल चिकित्सकीय परामर्श पर खांसी के इलाज में किया जाता है, लेकिन इसका दुरुपयोग नशे के रूप में किया जाता है। अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह सुस्ती, चक्कर और नशे जैसी स्थिति उत्पन्न कर सकता है, जिसके कारण अवैध बाजार में इसकी मांग बनी रहती है।

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