Self Help Group: स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा बड़ा बाजार, सार्वजनिक स्थानों पर खुलेंगी बिक्री की दुकानें

Self Help Group: स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा बड़ा बाजार, सार्वजनिक स्थानों पर खुलेंगी बिक्री की दुकानें
नोएडा। गौतमबुद्ध नगर प्रशासन ने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनके उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। प्रशासन अब बस स्टैंड, सरकारी परिसरों, मेलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर स्वयं सहायता समूहों के लिए विशेष बिक्री केंद्र और दुकानें स्थापित करने की तैयारी कर रहा है।
इस पहल का उद्देश्य महिला उद्यमियों और स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिले। प्रशासन का मानना है कि उचित बाजार उपलब्ध होने से ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों की मांग और बिक्री दोनों में बढ़ोतरी होगी।
गौतमबुद्ध नगर जिले में वर्तमान में करीब 1,500 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। ये समूह अचार, पापड़, मसाले, साबुन, हस्तशिल्प सामग्री और अन्य घरेलू उपयोग के उत्पाद तैयार करते हैं। हालांकि, इन उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने में कई चुनौतियां सामने आती रही हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए प्रशासन ने सार्वजनिक स्थलों पर बिक्री केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है।
हाल ही में दादरी के बढ़पुरा गांव के एक स्वयं सहायता समूह ने अपने अचार उत्पादों की बिक्री के लिए नोएडा रोडवेज बस स्टैंड पर दुकान उपलब्ध कराने की मांग की थी। इस संबंध में जिला विकास अधिकारी की ओर से नोएडा डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक को पत्र भेजा गया है, ताकि समूह को बिक्री के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराया जा सके।
जिला विकास अधिकारी शिव प्रताप परमेश ने बताया कि विकास भवन में पहले से ही एक बिक्री केंद्र संचालित किया जा रहा है, जहां विभिन्न स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया जा रहा है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब अन्य स्थानों पर भी ऐसे आउटलेट खोलने की योजना बनाई जा रही है।
उन्होंने बताया कि प्रशासन उन क्षेत्रों की पहचान कर रहा है जहां लोगों की आवाजाही अधिक रहती है। ऐसे स्थानों पर दुकानें स्थापित होने से स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को व्यापक बाजार मिलेगा और ग्रामीण महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकेगी।
प्रशासन का मानना है कि यह पहल न केवल महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देगी बल्कि स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।





