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Housing Scam Case: 14,000 करोड़ के हाउसिंग घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार समेत RBI और ED से मांगा जवाब

Housing Scam Case: 14,000 करोड़ के हाउसिंग घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार समेत RBI और ED से मांगा जवाब

नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र की हाउसिंग परियोजनाओं से जुड़े कथित 14,000 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। घर खरीदारों से एकत्रित हजारों करोड़ रुपये के कथित गबन और फंड डायवर्जन के मामले में अदालत ने केंद्र सरकार, प्रवर्तन निदेशालय (ED), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और कई रियल एस्टेट कंपनियों समेत अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सभी पक्षों को 15 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

यह मामला उन हजारों घर खरीदारों से जुड़ा है, जिन्होंने नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं में फ्लैट खरीदने के लिए अपनी जमा पूंजी लगाई थी, लेकिन वर्षों बाद भी उन्हें घर नहीं मिल सके। आरोप है कि बिल्डर्स ने खरीदारों से मिली रकम का इस्तेमाल निर्माण कार्य में करने के बजाय दूसरी कंपनियों और अन्य परियोजनाओं में कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ में Surya Kant, Joymalya Bagchi और Vipul M. Pancholi शामिल थे। अदालत ने याचिकाकर्ता वंदना सभरवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता Prashant Bhushan की दलीलों पर सुनवाई करते हुए कहा कि मामला बेहद जटिल और गंभीर है।

सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इसी तरह के आरोपों वाले एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप चुका है। हालांकि इस मामले में ईडी पहले से जांच कर रही है, इसलिए अदालत पहले उसका पक्ष जानना चाहती है।

अदालत ने केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय, ईडी, आरबीआई, उत्तर प्रदेश रेरा, नोएडा प्राधिकरण, यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) और कई रियल एस्टेट कंपनियों को नोटिस जारी किया है। जिन कंपनियों से जवाब मांगा गया है उनमें Jaiprakash Associates Limited, Jaypee Infratech Limited, Standard Chartered, CRC Homes, CRC Greens, गौर संस, गुलशन होम्स, महागुन और इंवेस्टर्स क्लीनिक जैसी कंपनियां शामिल हैं।

याचिकाकर्ता वंदना सभरवाल ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि यह मामला रियल एस्टेट सेक्टर में चल रही एक बड़ी व्यवस्थागत समस्या को दर्शाता है, जिसमें डेवलपर्स घर खरीदारों से मिली रकम को दूसरी जगह निवेश कर देते हैं। आरोप है कि कंपनियां जमीन और विकास अधिकारों को संबंधित समूह की अन्य कंपनियों को ट्रांसफर कर देती हैं, जिससे मूल परियोजनाएं दिवालिया होने की स्थिति में पहुंच जाती हैं और खरीदारों के सपने अधर में लटक जाते हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि ईडी की जांच में सामने आया है कि Jaiprakash Associates Limited और Jaypee Infratech Limited ने 25 हजार से अधिक घर खरीदारों से करीब 14,559 करोड़ रुपये एकत्र किए थे। आरोप है कि इस रकम का बड़ा हिस्सा निर्माण कार्य में लगाने के बजाय जयपी ग्रुप की अन्य कंपनियों और संबंधित संस्थाओं में ट्रांसफर कर दिया गया।

भूषण ने कहा कि जिन संपत्तियों और रकम को दूसरी जगह लगाया गया, उनकी पहचान या रिकवरी समय पर नहीं हो पाती। हालांकि ईडी ने अब तक करीब 400 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं, लेकिन कथित रूप से ट्रांसफर की गई कुल संपत्तियों का मूल्य 14,000 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में अब यह मामला हजारों घर खरीदारों की उम्मीदों से जुड़ गया है। प्रभावित खरीदारों को उम्मीद है कि अदालत के हस्तक्षेप के बाद जांच में तेजी आएगी और वर्षों से फंसी उनकी रकम और घरों को लेकर कोई ठोस समाधान निकल सकेगा।

 

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